नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से अगले एक साल तक गैर-जरूरी सोना न खरीदने की अपील के बाद सोमवार को शेयर बाजार में ज्वैलरी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। प्रधानमंत्री ने इस कदम के पीछे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने और व्यापार संतुलन को सुधारने का तर्क दिया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस अपील से आने वाले समय में सोने की मांग में बड़ी कमी आ सकती है, जिससे बड़े ज्वैलरी शोरूम्स की बिक्री और मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा। निवेशकों के बीच इस घोषणा के बाद से बेचैनी का माहौल है और ज्वैलरी सेक्टर की चमक फीकी पड़ती दिख रही है।
बीते रविवार को हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय युद्धों और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता का हवाला देते हुए नागरिकों से राष्ट्रहित में एकजुट होने का आह्वान किया था। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे सोने जैसी महंगी वस्तुओं के आयात को कम करने में मदद करें ताकि देश की पूंजी बाहर न जाए। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने रोजमर्रा के जीवन में “मेड-इन-इंडिया” उत्पादों को प्राथमिकता देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक चुनौतियों के इस दौर में सप्लाई चेन को सुचारू रखने के लिए संयम और स्वदेशी अपनाना अनिवार्य है।
प्रधानमंत्री की इस अपील पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसे सरकार की विफलता का प्रमाण बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 12 वर्षों के शासन के बाद अब जनता से बलिदान मांगा जा रहा है कि वे क्या खरीदें और क्या नहीं। गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अपनी नाकामियों की जिम्मेदारी जनता पर डालकर जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इसे एक समझौतावादी नेतृत्व का संकेत बताते हुए कहा कि देश को इस मोड़ पर लाकर खड़ा करना सरकार की नीतियों की हार है।

