
इंदौर. विशेष पॉक्सो अदालत ने 5 वर्षीय बालक के साथ दुष्कृत्य करने के मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. न्यायालय ने आरोपी पर जुर्माना भी लगाया है और पीड़ित को प्रतिकर योजना के तहत चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की अनुशंसा की है.
जिला अभियोजन संचालनालय इंदौर के प्रभारी उपनिदेशक अभियोजन राजेन्द्र सिंह भदौरिया ने बताया कि पंचम अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायालय (पॉक्सो अधिनियम) की न्यायाधीश श्रीमती रमा जयंत मित्तल ने थाना बाणगंगा के विशेष प्रकरण में आरोपी शिवम उर्फ मेंटोला को दोषी पाया. न्यायालय ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास तथा बीएनएस की धारा 377 के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया. साथ ही आरोपी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्रीमती वर्षा पाठक ने पैरवी की. वहीं न्यायालय ने पीड़ित को हुई शारीरिक और मानसिक क्षति को ध्यान में रखते हुए पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत 4 लाख रुपये की राशि प्रदान किए जाने की अनुशंसा भी की है.
यह था मामला…
अभियोजन के अनुसार 16 अप्रैल 2024 को पीड़ित बालक की मां ने आरक्षी केंद्र बाणगंगा पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी. उन्होंने बताया कि 15 अप्रैल 2024 की रात करीब 9 बजे वह घर पर काम कर रही थीं. उसी दौरान उनका छोटा भाई आया और बालक के बारे में पूछा. बालक बाहर खेलने गया था, लेकिन आसपास तलाश करने पर वह नहीं मिला. परिजनों ने आसपास के लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि बालक को शिवम के साथ जाते हुए देखा गया था. इसके बाद परिजन आरोपी के घर पहुंचे, जहां उसकी मां ने बताया कि शिवम बालक को अपने साथ कहीं ले गया है, लेकिन उसे यह नहीं पता कि वह कहां गया है. इसके बाद परिजन शिवम के घर की तीसरी मंजिल पर बालक को आवाज देते हुए तलाश करने पहुंचे. वहां उन्होंने देखा कि बाथरूम से शिवम बालक को लेकर बाहर आ रहा था. इस दौरान बालक रोते हुए परिजनों को बताया कि आरोपी ने उसके साथ गलत काम किया और जब उसने चिल्लाने की कोशिश की तो आरोपी ने उसका मुंह दबा दिया था. फरियादी की रिपोर्ट पर बाणगंगा पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की. विवेचना के दौरान पुलिस ने पीड़ित बालक का मेडिकल परीक्षण कराया, गवाहों के बयान दर्ज किए और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. संपूर्ण विवेचना के बाद पुलिस ने न्यायालय में चालान पेश किया. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में नौ गवाहों के बयान कराए और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी का अपराध सिद्ध किया. साक्ष्यों से सहमत होते हुए न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए उक्त दंड से दंडित किया.
