इंदौर/धार: धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे लंबे विवाद में नया मोड़ आ गया है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने करीब तीन महीने तक चले वैज्ञानिक सर्वेक्षण के बाद तैयार 2189 पेज की विस्तृत रिपोर्ट मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में पेश कर दी है. रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले में हलचल तेज हो गई है और अब 16 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं.
मिली जानकारी के अनुसार भोजशाला परिसर में एएसआई ने करीब 98 दिनों तक वैज्ञानिक पद्धति से सर्वे किया था. इस दौरान परिसर के विभिन्न हिस्सों में मौजूद संरचनात्मक अवशेषों, पत्थरों पर उकेरी गई आकृतियों, स्तंभों और स्थापत्य शैली का गहन अध्ययन किया. सर्वे में मिले साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण कर उन्हें दस्तावेजी रूप में रिपोर्ट में शामिल किया गया है. हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए दोनों पक्षों को दो सप्ताह का समय दिया था.
अब 16 मार्च को होने वाली सुनवाई में दोनों पक्ष अदालत के समक्ष अपने-अपने तर्क और आपत्तियां रखेंगे. इस कारण भोजशाला से जुड़े इस मामले को लेकर धार सहित पूरे प्रदेश में उत्सुकता बनी हुई है. सूत्रों के मुताबिक सर्वे के दौरान परिसर में मंदिर से जुड़े स्थापत्य अवशेषों, प्राचीन स्तंभों, नक्काशीदार पत्थरों और अन्य संरचनात्मक साक्ष्यों का उल्लेख रिपोर्ट में किया है. इन सभी तथ्यों को एएसआई ने विस्तृत दस्तावेजी स्वरूप में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया है.
रिपोर्ट सामने आने के बाद मंदिर पक्ष में उत्साह का माहौल है. याचिकाकर्ता आशीष गोयल का कहना है कि सर्वे के दौरान मिले साक्ष्य यह संकेत देते हैं कि परिसर में पहले मंदिर था और बाद में वहां मस्जिद का निर्माण हुआ. वहीं, कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी के सदर अब्दुल समद ने कहा कि उनकी ओर से रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है और 16 मार्च की सुनवाई में रिपोर्ट के विभिन्न पहलुओं पर अपनी आपत्तियां अदालत के सामने रखी जाएंगी
