जबलपुर: स्वयं की जान को खतरा तथा पुलिस द्वारा शिकायत पर अपेक्षित कार्यवाही नहीं किये जाने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका में इच्छामृत्यु की अनुमति प्रदान करने का आग्रह किया गया था। याचिकाकर्ता पिछली सुनवाई के दौरान बच्चे का भ्रूण लेकर हाईकोर्ट पहुंच गया था। हाईकोर्ट जस्टिस हिमांशु जोशी ने याचिका की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखने के निर्देश दिये है।
गौरतलब है कि रीवा लोकसभा के पूर्व उम्मीदवार दया शंकर पांडे की तरफ से हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि उसे जान का खतरा है। उसके कारण परिवार के सदस्यों को खतरा है। पारिवारिक सदस्यों के साथ जाते समय भी उस पर कई बार सड़क दुर्घटना के माध्यम से जानलेवा हमले किये गये। शिकायत करने के बावजूद भी पुलिस के द्वारा अपेक्षित कार्यवाही नही की गयी। याचिका में पूर्व में हुए हमले तथा संबंधित मामलों में दायर याचिकाओं का उल्लेख किया गया था।
याचिका में सभी शिकायत की जांच तथा इच्छा मृत्यु की राहत चाही गयी थी।पिछली सुनवाई के दौरान 9 मार्च को याचिकाकर्ता पॉलीथिन में अपने बच्चे का भ्रूण लेकर हाईकोर्ट पहुंच गया था। उसके द्वारा बताया गया था कि रीवा में विगत 1 मार्च को सड़क दुर्घटना के माध्यम से गर्भवती पत्नी के साथ जाते समय उस पर हमला हुआ था। जिसके कारण उसकी पत्नी का 7 मार्च को गर्भपात कराना पड़ा था। सुरक्षा में तैनात कर्मियों ने याचिकाकर्ता को नियंत्रित करते हुए भ्रूण को अपने कब्जे में लिया था।याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने एकलपीठ के समक्ष अपना पक्ष स्वयं रखते हुए घटनाओं की जानकारी दी। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किये है।
