जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की युगलपीठ ने उस मामले में आश्चर्य जताया है, जिसमें बस का टैक्स जमा न करने पर उसके संचालक के विरुद्ध ईओडब्ल्यू ने भ्रष्टाचार की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया। युगलपीठ ने ईओडब्ल्यू के डीजी और उनके लीगल एडवाइजर को व्यक्तिगत हलफनामे में जवाब पेश करने के निर्देश दिये है। जिसमें दोनों को यह बताना है कि कैसे टैक्स वसूली की कार्यवाही पर भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं में प्रकरण दर्ज हो सकता है। न्यायालय ने कहा है कि यदि अगली सुनवाई के पहले शपथ पत्र पेश नहीं किया गया तो दोनों अधिकारियों की व्यक्तिगत हाजिरी के आदेश करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को निर्धारित की गई है।
दरअसल याचिकाकर्ता डिंडोरी निवासी बस संचालक संजय केशवानी एवं साधना केशवानी की ओर से अधिवक्ता ब्रजेश दुबे, आशीष रावत व शंकर गुप्ता ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध बसों टैक्स बकाया था। इस मामले में ईओडब्ल्यू भोपाल ने याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध भ्रष्टाचार अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर दी। दलील दी गई कि बसों के टैक्स बकाया की वसूली की प्रक्रिया मोटर यान कराधान अधिनियम के प्रविधानों के तहत की जा सकती है। इस संबंध में कराधान अधिनियम की धारा 8 एवं 16 में प्रविधान है व आरटीओ डिंडौरी द्वारा जारी टैक्स डिमांड नोटिस जारी किये गए थे। याचिकार्ताओं ने टैक्स डिमांड को भी चुनौती दी है। इसके बावजूद ईओडब्ल्यू ने एक फर्जी शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली।
