नयी दिल्ली, 11 मार्च (वार्ता) केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने बुधवार को कहा कि देश की कपड़ा अर्थव्यवस्था को 350 अरब डालर तक पहुंचाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए बड़े पैमाने के उत्पादन , मूल्यवान उत्पाद और हर मौसम-हर माह के वस्त्र और परिधान की विनिर्माण क्षमता की ओर बढ़ना होगा।
भारत के कपड़ा क्षेत्र की वैश्विक बाजार में उपस्थिति के विस्तार की आवश्यकता पर बल देते हुए श्री सिंह ने कहा कि भारत को बड़े पैमाने पर उत्पादन, उच्च-मूल्य विनिर्माण और पूरे वर्ष के लिए परिधान उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ना होगा, ताकि सरकार के 2030–31 तक अपनी कपड़ा अर्थव्यवस्था को 350 अरब डॉलर और कपड़ा निर्यात को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।
कपड़ा मंत्री ने यहां उद्योग मंडल सीआईआई द्वारा आयोजित एक उच्च-स्तरीय औद्योगिक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक कपड़ा व्यापार में भारत की हिस्सेदारी वर्तमान 4.7 प्रतिशत है इसे बढ़कर 14.7 प्रतिशत तक पहुंचाना है। इस बैठक में कपड़ा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और कपड़ा उद्योग के प्रतिनिधि शामिल थे।
उन्होंने कहा कि भारत में परिधान विनिर्माण क्षेत्र में बदलाव की आवश्यकता है। वर्तमान में मुख्य रूप से गर्मियों के कपड़ों के उत्पादन पर केंद्रित है जो वैश्विक बाजार में लगभग आठ महीनों में चलने वाले परिधानों के लिए उपयुक्त होते हैं। आगे चलकर उद्योग को साल के सभी 12 महीनों के लिए उपयुक्त परिधान बनाने की क्षमता विकसित करनी होगी, ताकि भारत अधिक अंतरराष्ट्रीय बाजारों की जरूरतें पूरी कर सके और अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में कपड़ा उद्योग को सतत विकास और नवाचार आगे बढ़ाएंगे। भारत को वस्त्र तकनीक , मूल्य वर्धित परिधान और नवाचारी टेक्सटाइल उत्पादों में भी विविधता लानी चाहिए, जहां देश के पास वैश्विक नेतृत्व करने की मजबूत संभावना है।
घरेलू कपड़ा क्षेत्र को वैश्विक बाजार से मजबूती से जोड़ने के लिए सरकार द्वारा की जा रही पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कपड़ा क्षेत्र पर अंतराष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी भारत टेक्स्ट के आयोजन का जिक्र किया जो 14 से 17 जुलाई के बीच आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारतीय निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और निवेशकों से जोड़ने के लिए एक वैश्विक मंच के रूप में काम करेगा।
इस अवसर पर कपड़ा सचिव नीलम शमी राव ने कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने, विनिर्माण विस्तार, बुनियादी ढांचे के विकास और बाजार विविधीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत का वर्तमान फाइबर उत्पादन लगभग 1.5 करोड़ टन है, जिसे घरेलू उद्योग की वृद्धि के लिए बढ़ाकर लगभग 2.3 करोड़ टन करना होगा। श्रीमती राव ने कहा कि राष्ट्रीय फाइबर मिशन जैसी पहल इसमें सहायक होंगी।
कार्यक्रम में मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव रोहित कंसल ने कहा कि क्षेत्र के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए लगभग 100 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी, विशेष रूप से आधुनिक मशीनरी और तकनीक में। उन्होंने उद्योग से निवेश बढ़ाने का आह्वान किया।
कपड़ा उद्योग का प्रतिनिधित्व करते हुए अरविंद लि. के वाइस चेयरमैन कुलीन लालभाई ने कहा कि कई सक्षम सुधार लागू हो चुके हैं, इसलिए अब ध्यान परिधान विनिर्माण में बड़े पैमाने पर उत्पादन विकसित करने पर होना चाहिए, ताकि नए व्यापार समझौतों के लागू होने पर बढ़ती मांग को भारत पूरा कर सके।
