राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रहे देशों को आर्थिक एवं संस्थागत लचीलापन विकसित करना चाहिए: नशीद

जयंत रॉय चौधरी से
नयी दिल्ली, 11 मार्च (वार्ता) मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने कहा है कि दुनिया भर में राजनीतिक उथल-पुथल का सामना कर रहे देशों को बाहरी सहायता पर निर्भर रहने के बजाय आर्थिक और संस्थागत लचीलापन विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए। श्री नशीद ने मालदीव में अपने राजनीतिक अनुभव को याद करते हुए कहा कि राजनीतिक परिवर्तन शायद ही कभी सुचारू ढंग से होता है और इसमें अक्सर कई चुनौतियाँ शामिल होती हैं। उन्होंने मालदीव में लोकतांत्रिक सुधारों की अवधि को याद करते हुए इस प्रक्रिया को ‘थोड़ा उतार-चढ़ाव भरा’ बताया, लेकिन यह भी कहा कि इसने अंततः प्रदर्शित किया कि राजनीतिक परिवर्तन कैसे होना चाहिए।

पूर्व राष्ट्रपति ने नयी दिल्ली में आयोजित ‘सिनर्जिया’ सम्मेलन में कहा कि मालदीव जनता का समर्थन जुटाकर, संविधान में संशोधन करके और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराकर कई बाधाओं को दूर करने में सक्षम रहा। उन्होंने कहा, “मेरे विचार में, शासन इसी तरह बदला जाता है।” मालदीव के अनुभव को व्यापक वैश्विक संदर्भ में रखते हुए श्री नशीद ने जोर दिया कि राजनीतिक परिवर्तन से गुजर रहे देशों को अपनी आर्थिक नींव को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने विदेशी सहायता या वित्तीय सहायता पर अत्यधिक निर्भरता के खिलाफ चेतावनी दी। विश्लेषक लंबे समय से उन ऋण जालों के बारे में चेतावनी देते रहे हैं जिनमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र के कई देश भारी कर्ज लेकर महंगे बुनियादी ढांचे के निर्माण के कारण फंस रहे हैं। श्रीलंका का मामला इसका उदाहरण है जहाँ हंबनटोटा बंदरगाह के निर्माण हेतु लिए गए ऋण को चुकाने में असमर्थता के कारण उसे इस रणनीतिक बंदरगाह को 99 सालों के लिए चीन को लीज पर सौंपना पड़ा था। श्री नशीद ने कहा, “हमें वास्तव में लचीला होना चाहिए।” उन्होंने उल्लेख किया कि वित्तीय कमजोरी अक्सर देशों को कई बाहरी स्रोतों से सहायता मांगने के लिए मजबूर करती है।

श्री नशीद ने मालदीव की अपनी आर्थिक चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि देश का कर्ज जीडीपी के लगभग 144 प्रतिशत तक पहुंच गया है। जल्द ही एक अरब डॉलर से अधिक की देनदारियां देश को धन की तलाश करने के लिए मजबूर कर सकती है। पूर्व राष्ट्रपति ने हालांकि जोर देकर कहा, “हमें वास्तव में खुद को लचीला बनाने की जरूरत है। तब हम यहाँ-वहाँ नहीं दौड़ेंगे।” साथ ही, उन्होंने आगाह किया कि आर्थिक निर्भरता अंतरराष्ट्रीय संबंधों में राजनीतिक लाभ का जरिया नहीं बननी चाहिए। श्री नशीद ने चागोस द्वीप समूह से जुड़े विवाद पर भी चर्चा की, जहाँ डिएगो गार्सिया में अमेरिका का सबसे बड़ा हिंद महासागर सैन्य अड्डा है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा मालदीव के लोगों के लिए मुख्य रूप से मछली पालन पर इसके प्रभाव के कारण महत्वपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी दी कि मॉरीशस द्वारा बड़े ट्रॉलरों को मछली पकड़ने के लाइसेंस जारी करने से मालदीव के मछुआरे प्रभावित हो सकते हैं।

हिंद महासागर में उभरती भू-राजनीतिक स्थितियों पर टिप्पणी करते हुए, श्री नशीद ने तुर्की के साथ मालदीव के बढ़ते जुड़ाव के तर्क पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उनके लिए इस तरह के कदम के पीछे के रणनीतिक तर्क को समझना मुश्किल है। गौरतलब है कि तुर्की ने मालदीव को एक तीव्र गति से आक्रमण करने वाली नौसैनिक जहाज दिया है और 37 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ड्रोन बेचे हैं, जिससे कई सवाल खड़े हुए हैं। श्री नशीद की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब दुनिया भर के कई देश राजनीतिक संक्रमण, आर्थिक कमजोरी पर बहस और बदलती भू-राजनीतिक स्थितियों, विशेष रूप से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद महासागर क्षेत्र में बदलाव के गवाह बन रहे हैं।

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