ईरानी राजदूत मोहम्मद फतहाली ने अमेरिका को दो टूक जवाब देते हुए स्थायी शांति की शर्त रखी है। उन्होंने चाबहार प्रोजेक्ट की प्रगति और भारतीय जहाजों की सुरक्षा पर भी बड़ी बात कही।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अपने चरम पर है, साथ ही दोनों देशों के बीच शांति वार्ता लगभग ठप हो चुकी है। इस बीच जहां ईरान के नेता दुनियाभर के अपने सहयोगी देशों से मिलकर समर्थन जुटा रहा है। वहीं अमेरिका अपनी ताकत में इजाफा करने में लगा हुआ है। इसी बीच भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली ने मीडिया से बात करते हुए कड़े शब्दों में कहा है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चाबहार प्रोजेक्ट कभी नहीं रुका।
ईरानी राजदूत ने यह भी बताया कि ईरान अमेरिका से बात के लिए हमेशा से तैयार है लेकिन तेहरान की प्राथमिकता एक सटीक और स्थायी शांति स्थापित करना है न कि बार-बार युद्ध और युद्ध विराम के चक्र में फंसे रहना है। उन्होंने कहा शांति स्थापित करने के लिए ईरान की कुछ सीमाएं हैं। जैसे- NPT के तहत शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा का अधिकार, अन्यायपूर्ण प्रतिबंधों का अंत। इन मुद्दों पर ईरान कोई समझौता नहीं करेगा।
ट्रंप के दावे हकीकत से कोसों दूर
मोहम्मद फतहाली ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने ईरान के ढहने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि, ट्रंप के दावे और जमीनी हकीकत मेल नहीं खाते। फतहाली ने कहा ईरान ने इस युद्ध की तैयारी सालों पहले से करना शुरू कर दिया था। जिसका उसे फायदा भी हुआ। इसके साथ ही उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई पूरी तरह से स्वस्थ है और उन्हें लेकर फैलाई गई बातें केवल अमेरिका और इजरायल द्वारा जानबूझकर प्रसारित की गई अफवाह मात्र है।
ईरान द्वारा अमेरिका को भेजे गए प्रस्ताव में क्या है?
मोहम्मद फतहाली से ईरान द्वारा हाल ही में अमेरिका को भेजे गए नए प्रस्ताव में न्यूक्लियर बातचीत को टालने की बात कही गई थी, को लेकर कहा कि इस प्रस्ताव को लेकर कोई आधिकारिक विवरण जारी नहीं हुआ है; मीडिया में जो आ रहा है वह केवल अटकलों पर आधारित है। हमारा मानना है कि पहले युद्ध समाप्त कर स्थायी शांति स्थापित की जाए तभी अन्य मुद्दों का समाधान संभव है।
उन्होंने कहा ईरान बार-बार युद्ध, सीजफायर और फिर संघर्ष के चक्र में नहीं फंसना चाहते। हम शांति के लिए भी तैयार हैं और जरूरत पड़ने पर संघर्ष के लिए भी। कोई भी पहल जो टिकाऊ शांति की ओर ले जाए, उसका हम स्वागत करेंगे।
ईरान की जनता को शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा का अधिकार
फतहाली ने न्यूक्लियर डील के लिए ईरान की नॉन-नेगोशिएबल शर्तें के बारे में बात करते हुए कहा कि ईरान के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण है। ईरान की जनता को शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा का अधिकार है। उन्होंने कहा हम परमाणु हथियारों के अप्रसार संगठन (NPT) के सदस्य हैं और अंतरराष्ट्रीय नियमों को ध्यान में रखकर काम कर रहे हैं।
साथ ही ईरान पर लगाए गए सभी अन्यायपूर्ण प्रतिबंधों को हटाना हमारी मुख्य शर्त है। दशकों से इन प्रतिबंधों ने हमारी अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य व्यवस्था और नागरिक जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है फ्रीज किए गए एसेट्स, दवाओं की कमी, और तकनीकी प्रतिबंध इसके उदाहरण हैं।
क्या भारतीय जहाजों को मिलेगी होर्मुज में सुरक्षा की गारंटी?
फतहाली से जब पूछा गया कि क्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकलने का गारंटी देगा? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि, तेहरान अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करता है। जिन देशों ने हमारे खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लिया, उनके जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिया जाता है। भारत जैसे मित्र देशों के जहाजों के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है। अब तक कई भारतीय जहाज सुरक्षित गुजर चुके हैं और आगे भी ऐसा ही जारी रहेगा, बशर्ते निर्धारित नियमों का पालन किया जाए।
चाबहार प्रोजेक्ट का 90 प्रतिशत काम पूरा
मोहम्मद फतहाली ने ईरान में भारत के चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट पर कहा कि, चाबहार प्रोजेक्ट पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से कोई असर नहीं होने चाहिए। यह एक रणनीतिक प्रोजेक्ट है। यह भारत, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। चाबहार-जाहेदान रेलवे लगभग 90% पूरा हो चुका है और जल्द ही पोर्ट राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा। उन्होंने कहा आने वाले महीनों में इसके बुनियादी ढांचे जैसे अस्पताल और होटल का विकास इसे एक प्रमुख आर्थिक और सामाजिक केंद्र बना देगा।
ईरान में भारतीयों को धार्मिक स्वतंत्रता का पूर्ण अधिकार
ईरानी राजदूत ने ईरान में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों को लेकर कहा कि, हमारे लिए ईरान में रहने वाले भारतीय और ईरानी नागरिक समान हैं। उनकी सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता पूरी तरह सुरक्षित है। भारत के लगभग 10,000 नागरिक, विशेषकर सिख समुदाय, दशकों से बिना किसी बाधा के अपने धर्म का पालन कर रहे हैं। हमारा संविधान सभी धर्मों को समान अधिकार देता है। वर्तमान क्षेत्रीय तनाव के बावजूद, हम उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
