इंदौर: एक बार फिर केंद्र सरकार के निर्णय के चलते देश के मध्य परिवार का मासिक बजट डगमगा गया है. जहां महंगाई कम होने के बजाए उसमें बढ़ोतरी होने और एक अप्रैल से गैस सिलेंडर पर नए फरमान पर देश वासियों की चिंता की लकीरें बढ़ गई हैं.अब आंकलन यह भी लगाया जा रहा है कि धीरे-धीरे गैस के दामों में और भी ज़्यादा वृद्धि हो सकती है.
हालांकि पचास रूपए की वृद्धि से बजट असंतुलन तो हुआ है. घरेलु गैस के दामों के लिए देश के दूसरे बड़े शहरों पर नज़र डाले तो रेट कुछ इस तरह होंगे- दिल्ली 853, कोलकत्ता 879, मुंबइ 852, चेन्नई 858 लखनव 890, पटना 951, जयपुर 856, देहरादूर 850, शिमला 897, भोपाल 898, गांधी नगर 878, इंदौर 881, साउथ अंडोमान 929, कारगिल 985, विशाखा पटनम 861 रूपए प्रति सिलेंडर रेट हुए है.
इनका कहना है
जिसे कम होना था उसी में बढ़ोतरी होने से आम आदमी के बजट पर भार पड़ने लगता है. महंगाई तो कम होने का नाम ही नहीं ले रही है. केंद्र सरकार को मध्य वर्ग के लिए सोचना होगा.
ज्योति पिंजवा
पहले भी गैस के दाम बढ़ते-बढ़ते इतने बढ़ गए थे कि प्रति सिलेंडर बारह सौ रूपए तक छू गया था. कहीं ऐसा न हो कि इस बार भी बढ़ोतरी शुरू हुई तो कम होने का नाम नहीं ले.
सुभाष जोशी
आम ज़रूरतों के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को चाहिए कि वह ज़्यादा उद्योग लगाए ताकि निर्यात में बढ़ोतरी हो और मंहगाई में गिरावट हो. हर वर्ग के लिए मंथन हो और हर परिवार खुशहाल हो तभी देश बढ़ेगा.
राकेश बागड़ी
