जबलपुर: मध्यप्रदेश शासन के पायलट प्रोजेक्ट के तहत जिला अस्पताल विक्टोरिया में अब डॉक्टर्स द्वारा अपनी हैंडराइटिंग सेे पर्चे में दवाईयां लिखने की बजाय कंप्यूटर पर दवाईयां लिखनीं होंगी उसके बाद से पर्चा मरीजों व उनके परिजनों के हाथ में आएगा। इस नई व्यवस्था में 24 कंप्यूटर आने के प्रावधान के तहत जिला अस्पताल विक्टोरिया में कंप्यूटर आने शुरू हो गए हैं।
पूरी व्यवस्था एक माह में चालू कर दी जाएगी। इस नई व्यवस्था के जिला अस्पताल विक्टोरिया में लागू होने से जहां मरीज व परिजन खुद दवाईयों के नाम आसानी से पढ़ सकेंगे तो वहीं मरीज का रिकॉर्ड अस्पताल में डिजिटली रूप में संभालकर रखा जाएगा।जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल के कंप्यूटर एक्सपर्ट्स द्वारा अस्पताल के डॉक्टर्स, फार्मासिस्ट और नर्सों को पहले चरण की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। विक्टोरिया अस्पताल में करीब 24 कंप्यूटर लगने के बाद दोबारा इन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी। विदित हो कि प्रदेश भर के लगभग सभी जिला अस्पतालों में अभी सिर्फ ओपीडी का पर्चा कम्प्यूटराइज्ड बनाया जा रहा है। साथ ही दवाओं की एंट्री कम्प्यूटराइज्ड की जा रही है।
प्रोजेक्ट की सफलता पर सवाल बरकरार
पर्चा न दवाईयों के नाम न लिखकर कंप्यूटर पर पर्चा लिखने का प्रोजेक्ट कहां तक सही साबित होगा, कितना सक्सेस होगा ये तो आने वाला समय बताएगा लेकिन फिलहाल शासन के निर्देशों के तहत इस पर काम होना शुरू हो गया है। सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा ने नवभारत से कहा है कि कोशिश पूरी की जाएगी कि अस्पताल में डॉक्टर्स द्वारा अपी हैंडराइटिंग में पर्चा न लिखकर कंप्यूटर पर लिखा जाए और फिर ये पर्चा मरीजों व उनके परिजनों के हाथ लगे। जिससे लोगों को डॉक्टर्स की हैंडराइटिंग समझने में कोई परेशानी भी न हो। अभी तक ऐसा देखा गया है कि कई बार डॉक्टर्स द्वारा अपनी हैंड राइटिंग में लिखी गई दवाईयों के नाम मरीज व उनके परिजनों के साथ साथ दवा विक्रेताओं को भी समझ में नहीं आ पाते हैं ।
इनका कहना है
मप्र शासन के पायलट प्रोजेक्ट के तहत जिला अस्पताल विक्टोरिया में नई व्यवस्था लागू की जानी है जिसको शुरू होते-होते अभी 1 माह का समय लग जाएगा। अभी अस्पताल में कंप्यूटर आने शुरू हो गए हैं। डॉक्टर्स द्वारा अब कंप्यूटर पर दवाईयां लिखीं जाएंगी और फिर ये कंप्यूटर का पर्चा मरीजों को दिया जाएगा।
डॉ. संजय मिश्रा, सीएमएचओ, जबलपुर।
