तेहरान/यरूशलम: ईरान और इजरायल के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच अब पूरे मध्य‑पूर्व में तेल के बाद पानी को लेकर भी संभावित टकराव की आशंकाएं जताई जाने लगी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में पहले से ही जल संकट गंभीर है और यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो जल संसाधनों पर दबाव और बढ़ सकता है।
विश्लेषकों के अनुसार मध्य-पूर्व के कई देश सीमित जल स्रोतों, घटते भूजल स्तर और बढ़ती आबादी से जूझ रहे हैं। युद्ध की स्थिति में जल आपूर्ति व्यवस्था, बांधों और पाइपलाइन जैसी संरचनाओं पर खतरा बढ़ सकता है। इससे क्षेत्रीय देशों के बीच संसाधनों को लेकर तनाव और गहरा सकता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक संघर्ष का केंद्र ऊर्जा और सामरिक ठिकाने रहे हैं, लेकिन यदि स्थिति व्यापक हुई तो जल स्रोत भी रणनीतिक मुद्दा बन सकते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय क्षेत्र में तनाव कम करने और मानवीय संकट को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करने की आवश्यकता पर जोर दे रहा है।
