आस्था एवं श्रद्धा के साथ मनाया गया शीतला सप्तमी पर्व, शीतला माता मंदिरों में अलसुबह से लेकर देर शाम तक रहीं भीड़

झाबुआ। शीतला सप्तमी पर्व 10 मार्च, मंगलवार को शहर में आस्था एवं श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शहर के शीतला माता मंदिरों में माताजी के दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए अलसुबह से लेकर देर शाम तक भक्तों की भी लगी रहीं‌। श्रद्धालुओं ने इस दिन अपने घरों पर एक दिन पूर्व बना ठंडा भोजन ग्रहण किया। साथ ही घर आने वाले मेहमानों की नवाजी भी विशेष व्यंजनों से की गई। पर्व का उल्लास शहर में दिनभर देखने को मिला‌। शीतला सप्तमी पर शहर के छोटा तालाब स्थित प्राचीन श्री शीतला माता मंदिर पर अलसुबह 4 बजे से ही महिलाओं का सज-संवरकर पूजा की थालियां सजाकर पहुंचना आरंभ हो गया था। सुबह के दौर में शीतला माता मंदिर में महिलाओं एवं पुरुषों की माताजी के दर्शन-पूजन हेतु लंबी कतार रहीं। श्रद्धालुओं ने यहां शीतला माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के साथ नारियल बदारा एवं माताजी को विशेष व्यंजनों का भोग लगाया गया। यथाशक्ति दान-पुण्य भी किया गया। महिलाओं ने शीतला माता से परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि हेतु कामना की। श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और उमंग का वातावरण देखने को मिला। मंदिर परिसर में समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए धूप में छांव हेतु टेंट लगाने के साथ शीतल पेयजल की व्यवस्था की गई। साथ ही मंदिर प्रांगण में बच्चों के खिलौने एवं स्वल्पाहार आदि की दुकानें भी लगी। इसी प्रकार शहर के गोपाल कॉलोनी स्थित शीतला माता मंदिर पर भी सुबह से लेकर शाम तक भक्तों की दर्शन-पूजन के लिए भीड़ रहीं। यहां भक्तजन माताजी के दर्शन के लिए लालायित नजर आए। शीतला सप्तमी पर्व को लेकर मंदिर में एक दिन पूर्व रंग-रोगन के साथ विशेष व्यवस्था की गई। डीआरपी लाइन में श्री गोपेश्वर महादेव मंदिर स्थित माताजी मंदिर पर भी श्रद्धालुओं की दर्शन-पूजन के लिए भीड़ नजर आई‌। *विशेष व्यंजन ग्रहण किए गए -* शीतला सप्तमी पर परंपरा अनुसार महिलाओं ने एक दिन पूर्व अपने घरों पर विशेष व्यंजन बनाकर तैयार किए गए। पर्व के दिन घरों में गैस एवं चूल्हा नहीं जलाया जाता है। एक दिन पूर्व बना भोजन ग्रहण किया जाता है। साथ ही घर आने वाले मेहमानों की नवाजी भी विशेष व्यंजनों से की जाती है। श्रद्धालुओं ने इस दिन व्रत एवं उपवास रखकर भी शीतला माता की आराधना की। साथ ही दिनभर पर्व की शुभकामनाएं देने का क्रम चलता रहा। *नहीं दिखे रायबुलिए, रहा स्थानीय अवकाश -* शीतला सप्तमी पर प्रतिवर्ष आसपास के अंचलों से रायबुलिए बनकर ग्रामीणों की टोलियां पहुंचती है। जिसमें रायबुलिया बना युवक चेहरे पर कालिख पोतकर हरे झाड़-पत्तियों से ढंका रहता है। उसके साथ एक महिला द्वारा ढ़ोल बजाते हुए पर्व की गोट मांगी जाती है। यह रायबुलिए इस बार शहर में ना के बराबर दिखाई दिए। दूसरी ओर 10 मार्च को शीतला सप्तमी का स्थानीय अवकाश होने से अधिकारी-कर्मचारी वर्ग के साथ अधिकांश व्यापारियों ने भी इस दिन अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर यह पर्व उत्साह और उल्लास के साथ मनाया। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं प्रेषित की।

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