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खंडवा। सूरज ने अभी पूरी तरह आंखें तरेरी भी नहीं हैं कि ‘निमाड़’ की तपती धरती पर जल संकट ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। विडंबना देखिए, एक तरफ सरकार ‘अमृत जल योजना 0.2’ के डंके पीट रही है, तो दूसरी तरफ गर्मी के शुरूआत से ही स्मार्ट सिटी की जनता बूंद-बूंद पानी को तरस रही है। ताज़ा मामला स्मार्ट सिटी ‘सी’ ब्लॉक (संतोषी माता वार्ड) का है, जहां के रहवासियों ने कलेक्टर के जनसुनवाई दरबार में व्यवस्था के खिलाफ हल्ला बोल दिया है।
जिम्मेदार कौन? निगम कहता है ‘बिल्डर’, बिल्डर कहता है ‘निगम’!: जनसुनवाई में दिए गए आवेदन के अनुसार, स्मार्ट सिटी ‘सी’ ब्लॉक में करीब 150 परिवार नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। कॉलोनी की बोरिंग दिसंबर में ही दम तोड़ चुकी है। जनता जब नगर निगम के पास जाती है, तो अधिकारी पल्ला झाड़ते हुए कहते हैं— यह काम कॉलोनाइजर अभय जैन का है। वहीं कॉलोनाइजर का दावा है कि उसने कॉलोनी निगम को हैंडओवर कर दी है और अब यह जिम्मेदारी वारसी ग्रुप या निगम की है।
सवाल यह है कि इस पास-पास के खेल में जनता कब तक प्यासी मरेगी? कैसा न्याय? पैसे लिए पर पानी नहीं!
रहवासियों का आरोप है कि नगर निगम ने शिविर लगाकर उनसे वैध नल कनेक्शन के नाम पर मोटी राशि जमा करवाई। पैसे तिजोरी में जाते ही निगम को जनता की सुध नहीं रही। ताज्जुब की बात यह है कि अमृत योजना की पानी की पाइपलाइन इसी कॉलोनी के सामने से गुजर रही है, लेकिन कॉलोनी को उससे जोडऩे में अधिकारियों के हाथ-पांव फूल रहे हैं।
स्मार्ट सिटी के रहवासियों ने साफ कर दिया है कि नई टंकी से जल प्रदाय शुरू नहीं किया गया, तो वे सभी रहवासी परिवारो सहित आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
