नयी दिल्ली, 9 मार्च (वार्ता) केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि विश्व बाजार में उभरते अवसरों का लाभ उठाने के लिए देश में एक समग्र स्वास्थ्य सेवा पारिस्थितिकी तंत्र (हेल्थकेयर इकोसिस्टम) विकसित किया जाना चाहिए जिसमें विनिर्माण, नवाचार, स्टार्टअप और अस्पतालों को एक साथ जोड़ा जाए।
श्री गोयल ने कहा कि ऐसा एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत के अब तक हुए और प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से उत्पन्न अवसरों का पूर्ण रूप से उपयोग करने में सक्षम बनाएगा। वह बजट 2026-27 पर राष्ट्रीय वेबीनार श्रृंखला के चौथे वेबिनार के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस वेबिनार का विषय था ‘सबका साथ, सबका विकास: जनता की आकांक्षाओं की आपूर्ति’ इसका उद्घाटन सुबह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था।
वाणिज्य मंत्री ने कहा कि समग्र स्वास्थ्य सेवा पारिस्थितिकी तंत्र के विकास की इस प्रक्रिया में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) अपनी गुणवत्ता में सुधारक र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनके अनुसार, गुणवत्ता मानकों और परीक्षण सुविधाओं को मजबूत करने से यह सुनिश्चित होगा कि भारत से निर्यात किए जाने वाले उत्पाद “ब्रांड इंडिया” की छवि को मजबूत करें और वैश्विक स्तर पर देश की क्षमताओं को प्रदर्शित करें।
उन्होंने मंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र को निर्यात के साथ अधिक मज़बूती से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को केयरगिवर्स और नर्सों जैसे कुशल पेशेवरों के प्रशिक्षण पर ध्यान देना चाहिए, जिनकी मांग भारत और विदेशों दोनों में काफी अधिक है। कौशल विकास को सुदृढ़ बनाकर भारत ऐसा कार्यबल तैयार कर सकता है जो निर्यात को बढ़ावा दे, विदेशों से भारतीय लोगों द्वारा प्रेषित धन (रेमिटेंस) में वृद्धि करे और भारतीय उत्पादों व सेवाओं की वैश्विक उपस्थिति को मजबूत बनाए।
श्री गोयल ने डिजिटल हेल्थ और उभरती प्रौद्योगिकियों के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल हेल्थ के एकीकरण को वैश्विक स्तर पर तेजी से महत्व मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के कई क्षेत्रों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों का विस्तार कर रहा है। कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और क्षेत्रों के साथ एफटीए हो चुके हेैं या इसके लिए बातचीत जारी है। उन्होंने इसी संदर्भ में अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के चार देशों-स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, लिकटेंस्टीन और आइसलैंड-के साथ हुए समझौतों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के साथ भी समझौते संपन्न हो चुके हैं, जबकि खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सभी छह देशों ने भारत के साथ समझौते करने में रुचि व्यक्त की है।
उन्होंने यह भी कहा कि कनाडा के साथ बातचीत तेज़ी से आगे बढ़ रही है, जबकि लैटिन अमेरिका के मर्कोसुर देशों और यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ भी वार्ताएँ प्रगति पर हैं।
श्री गोयल ने कहा कि भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने में बढ़ती वैश्विक रुचि भारत की आर्थिक क्षमता की पहचान को दर्शाती है। उन्होंने उल्लेख किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था, जिसका वर्तमान मूल्य लगभग चार ट्रिलियन डॉलर (चार लाख करोड़ डॉलर) है, अगले दो से ढाई दशकों में लगभग तीस लाख करोड़ डॉलर तक पहुँच सकती है, जो वैश्विक आर्थिक भागीदारी के लिए एक ऐतिहासिक अवसर प्रस्तुत करती है।
