मुंबई, 09 मार्च (वार्ता) अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत से ज्यादा उछाल के कारण रुपये पर सोमवार को भारी दबाव रहा और यह 39 पैसे टूटकर 92.21 रुपये प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ।
पिछले कारोबारी दिवस पर भारतीय मुद्रा 17.50 पैसे फिसलकर 91.82 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई थी।
रुपये पर आज शुरू से ही दबाव रहा। यह 40.50 पैसे की गिरावट में 92.2250 रुपये प्रति डॉलर पर खुला। एक समय यह 92.35 रुपये प्रति डॉलर तक उतर गया था।
बाद में रिजर्व बैंक द्वारा वाणिज्यिक बैंकों के माध्यम से डॉलर बेचने से यह 92.15 रुपये प्रति डॉलर तक मजबूत हुआ।
मुथूट फिनकॉर्प की मुख्य अर्थशास्त्री अपूर्वा जावड़ेकर ने कहा कि रुपये पर मजबूत डॉलर, कच्चे तेल में तेजी और घरेलू स्तर पर मुद्रास्फीति बढ़ाने की आशंका का तिहरा दबाव है। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक अल्पावधि में रुपये को समर्थन देता रहेगा। लेकिन यदि लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमत ऊंची बनी रहती है या पूंजी प्रवाह सुस्त रहता तो केंद्रीय बैंक ज्यादा मदद नहीं कर सकेगा।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल आज 10 प्रतिशत से ज्यादा उछल गया। साथ ही दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर सूचकांक की मजबूती और विदेशी संस्थागत निवेशकों के भारतीय पूंजी बाजार से पैसा निकालने से भी रुपये पर दबाव रहा।
