ग्वालियर के प्रमुख विद्वान, इतिहासकार, पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक रविन्द्र मालव नहीं रहे, शोक व्याप्त

ग्वालियर: ग्वालियर के प्रमुख विद्वान, इतिहासकार, पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक रविन्द्र मालव का आकस्मिक निधन हो गया है। वे मुख्य रूप से ग्वालियर के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विकास में जैन धर्म के योगदान पर अपने शोध और लेखन के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने “ग्वालियर के सांस्कृतिक विकास में जैन धर्म” जैसी महत्वपूर्ण शोधपूर्ण कृतियाँ लिखी हैं, जो इस क्षेत्र के प्राचीन इतिहास और धार्मिक विरासत पर प्रकाश डालती हैं। वे ग्वालियर में जैन समुदाय की विभिन्न धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहते थे। वे आचार्य विद्यासागर महाराज के ग्वालियर आगमन जैसी प्रमुख धार्मिक व्यवस्थाओं की समितियों में भी शामिल रहे।

उन्हें ग्वालियर और चंबल संभाग के इतिहास, विशेषकर जैन पुरातत्व और संस्कृति के विशेषज्ञ के रूप में पहचाना जाता था। वे राजनीतिक रूप से भी सक्रिय रहे। प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री स्व. श्यामलाल पांडवीय की पारिवारिक एवं राजनीतिक विरासत को उन्होंने सफलतापूर्वक निर्वाह किया। तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ला के कार्यकाल में वे विधानसभा के सचिव रहे तो कांग्रेस संगठन में भी कई महत्वपूर्ण पदों को सुशोभित कर समाज के वंचित वर्ग के उत्थान के लिए समर्पित रहे।

रविन्द्र मालव स्वर्गीय प्रेमचंद जैन के सुपुत्र थे। उनका फालका बाजार, लश्कर स्थित निवास सांस्कृतिक एवं धार्मिक बहस, विचार संगोष्ठी का केन्द्र बना रहता था। ग्वालियर के धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक जगत में गहन शोक व्याप्त हो गया। पल्लीवाल जैन महासभा के निर्मल कुमार जैन एवं डॉ. संगीता जैन ने स्व. श्री रविन्द्र मालव के आकस्मिक निधन को ग्वालियर शहर एवं जैन जगत की अपूर्णीय क्षति निरूपित करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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