नयी दिल्ली, 8 मार्च। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि वास्तविक अर्थों में विकास हासिल करने के लिए महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है क्योंकि वह देश की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं।
श्रीमती मुर्मु ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं की उपलब्धियों और योगदानों का सम्मान करना और लैंगिक समानता, सुरक्षा, गरिमा तथा सशक्तिकरण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि आज महिलाएं शिक्षा, प्रशासन, न्यायपालिका, सेना, चिकित्सा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कला और उद्यमिता जैसे लगभग हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और पंचायतों के जरिए ग्रामीण विकास में भी नेतृत्व कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग, स्टार्टअप और कॉर्पोरेट जगत में भी महिलाएं अपनी क्षमताओं का प्रभावी उपयोग कर रही हैं और खेलों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं।
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि भारत महिला नेतृत्व वाले विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पिछले एक दशक में महिलाओं के सामने आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए मजबूत आधार तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि देश ने स्कूली शिक्षा में लैंगिक समानता हासिल कर ली है और उच्च शिक्षा में भी छात्राओं की भागीदारी अधिक है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) शिक्षा में भी महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में एसटीईएम विषयों में पढ़ाई कर रही छात्राओं को सहायता देने के लिए प्रत्येक जिले में महिला छात्रावास स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। इससे देश की बेटियों को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में नेतृत्व की भूमिका निभाने के अवसर मिलेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं अब रोजगार सृजनकर्ता के रूप में भी उभर रही हैं। स्टार्टअप इंडिया योजना के तहत सहायता प्राप्त करने वाले आधे से अधिक स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक है। इसके अलावा दो लाख से अधिक महिला स्वामित्व वाले लघु एवं मध्यम उद्यम जेम (सरकारी खरीदारी के लिये मंच ) पर सक्रिय हैं। केंद्रीय बजट 2026-27 में शुरू की गई ‘सी -मार्ट’ पहल स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में मदद करेगी।
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई प्रयासों के बावजूद अभी भी उन्हें भेदभाव, समान काम के लिए असमान वेतन और घरेलू हिंसा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान केवल कानून बनाकर संभव नहीं है, बल्कि समाज की सोच में बदलाव लाना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखा है और इसे हासिल करने के लिए महिलाओं की पूर्ण भागीदारी जरूरी है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि हर लड़की को शिक्षा और समान अवसर उपलब्ध कराए जाएं तथा महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा को प्राथमिकता दी जाए।
