नयी दिल्ली, 27 अगस्त (वार्ता) केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की चेन्नई की विशेष सीबीआई अदालत ने दो फिल्म निर्माण कंपनियों के एक निदेशक और आठ अन्य द्वारा 10 करोड़ रुपये के ऋण धोखाधड़ी करने के 35 साल से भी ज़्यादा समय बाद आरोपियों को विभिन्न कारावास की सज़ा सुनाई है।
अदालत ने पी. स्वामीनाथन और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन शाखा प्रबंधक टी.आर. वेंकटरमण को नौ साल की जेल और 45,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। के. श्रीनिवासन नामक व्यक्ति को छह साल के कठोर कारावास और 20,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई। अदालत ने जी.वी. फिल्म्स लिमिटेड पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
वेंकटेश्वरन और चार अन्य आरोपियों की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई थी और उनके खिलाफ आरोप हटा दिए गए।
सीबीआई ने 1996 में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, चेन्नई द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरोपियों ने 1988 और 1992 के बीच सुजाता फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड और जी.वी. फिल्म्स लिमिटेड के नाम पर ऋण और सावधि ऋण सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए साजिश रची थी। वेंकटेश्वरन ने बेईमानी से झूठे दस्तावेज़ पेश किए थे।
अधिकारियों के अनुसार बैंक अधिकारियों ने आरोपी कंपनियों को धनराशि स्वीकृत करने के लिए अपने आधिकारिक पदों का दुरुपयोग किया, जिससे बैंक को 10.19 करोड़ रुपये का गलत नुकसान हुआ।
