1965 की लड़ाई के नायक वीर चक्र हवलदार के. जी. जार्ज का 95 वर्ष की आयु में निधन

नयी दिल्ली 07 मार्च (वार्ता) पाकिस्तान के साथ 1965 की लड़ाई में रणक्षेत्र में भीषण गोलाबारी के बीच असाधारण बहादुरी का प्रदर्शन करने वाले सेना की सिग्नल कोर के वीर चक्र विजेता हवलदार के जी जॉर्ज का शनिवार को 95 वर्ष की आयु में केरल में निधन हो गया। वह सिग्नल कोर के अंतिम जीवित वीर चक्र पुरस्कार विजेता थे। सेना ने शनिवार को बताया कि हवलदार जॉर्ज का सुबह सवा पांच बजे केरल में उनके कोट्टायम जिले स्थित निवास पर निधन हो गया। सेना ने कहा है कि वह अपने एक ऐसे साहसी पूर्व सैनिक को विदाई दे रही है जिनका 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान साहस और कर्तव्यनिष्ठा, सैन्य पेशेवरता और बलिदान का स्थायी उदाहरण बनी रहेगी। इस लड़ाई में उस समय के लांस हवलदार (लाइनमैन फील्ड) के रूप में 50 (स्वतंत्र) पैराशूट ब्रिगेड सिग्नल कंपनी में तैनात हवलदार जॉर्ज ने 6 से 10 सितंबर 1965 के बीच वाघा सेक्टर में भीषण युद्ध अभियानों के दौरान असाधारण बहादुरी का प्रदर्शन किया।

इस अवधि में क्षेत्र लगातार दुश्मन की तोपों की गोलाबारी और हवाई हमलों का सामना कर रहा था, जिससे ब्रिगेड मुख्यालय और अग्रिम बटालियनों के बीच महत्वपूर्ण संचार लाइनें बार-बार बाधित हो रही थीं। गंभीर खतरे के बावजूद, लांस हवलदार जॉर्ज ने अपने दल का नेतृत्व करते हुए अद्भुत दृढ़ता के साथ इन बाधित संचार लाइनों को बहाल किया। आठ और नौ सितंबर 1965 की महत्वपूर्ण रात को दुश्मन के हमले के दौरान उन्होंने अपने प्राणों की परवाह किए बिना ब्रिगेड मुख्यालय से अग्रिम बटालियनों तक संचार लाइन स्थापित की, जिससे युद्ध के एक निर्णायक चरण में कमान और नियंत्रण निर्बाध बना रहा।
गोलाबारी के बीच उनका अडिग साहस, नेतृत्व और कर्तव्य के प्रति समर्पण युद्धक्षेत्र में संचालनात्मक समन्वय बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।

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