नयी दिल्ली, 07 मार्च (वार्ता) पश्चिम एशिया में ईरान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच वर्ल्ड पीस फोरम (डब्ल्यूपीएफ) के पूर्व महासचिव येन श्वेतोंग ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के तहत भविष्य में अन्य देशों के साथ भी संघर्ष की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। श्री श्वेतोंग ने यूनीवार्ता को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि हाल की घटनाएं वैश्विक राजनीति में एक चिंताजनक पैटर्न की ओर संकेत करती हैं। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी संभावित अमेरिकी हमले से बचाव के लिए किसी बाहरी शक्ति पर निर्भर नहीं रह सकता। उनके अनुसार ट्रंप प्रशासन ने 12 महीनों में सात देशों पर हमले किए और अब ईरान को निशाना बनाया गया है, जिसके बाद किसी अन्य देश को भी निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे नए संस्थागत ढांचे और मानदंडों की आवश्यकता है जो संप्रभुता की सुरक्षा को केवल सैद्धांतिक न रखकर व्यावहारिक बना सकें। उनके अनुसार इस दिशा में क्षेत्रीय सहयोग सबसे यथार्थवादी प्रारंभिक कदम हो सकता है। श्री श्वेतोंग ने यह भी कहा कि अमेरिका विभिन्न देशों पर आर्थिक दबाव और प्रतिबंधों का भी व्यापक उपयोग कर रहा है, जैसा कि वेनेजुएला और ईरान के मामलों में देखा गया है। उनके अनुसार आर्थिक दबाव और भू-राजनीतिक रणनीति का यह संयोजन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और टकराव पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा, “असली सवाल सिर्फ़ ईरान के बारे में नहीं है, यह इस बारे में है कि क्या किसी भी देश की संप्रभुता की रक्षा की जा सकती है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर कहता है कि सदस्य देशों को एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए, लेकिन यह हमें यह नहीं बताता कि इसे कैसे लागू किया जाए, जब उल्लंघन करने वाला दुनिया का सबसे ताकतवर देश हो।”
वैश्विक शक्ति संतुलन पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ की मौजूदगी अमेरिका की सैन्य कार्रवाइयों पर एक प्रकार का संतुलन बनाती थी, लेकिन वर्तमान समय में कोई भी देश उस स्तर की सैन्य क्षमता नहीं रखता जो अमेरिका की एकतरफा कार्रवाइयों को प्रभावी ढंग से सीमित कर सके। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ते तनाव पर उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों का मुद्दा संभवतः इस टकराव का मुख्य कारण नहीं है। उनके अनुसार यदि कोई देश वास्तव में परमाणु हथियार बनाना चाहता है तो वह लगभग दो वर्षों में ऐसा कर सकता है। ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। श्री श्वेतोंग का मानना है कि लंबे समय से जारी विवाद से संकेत मिलता है कि परमाणु मुद्दा वास्तविक विवाद का मूल कारण नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि अमेरिका में इज़रायल के प्रभावशाली लॉबिंग के कारण लगाए गए प्रतिबंधों और दबाव का सबसे अधिक नुकसान आम ईरानी नागरिकों को हुआ है। श्री श्वेतोंग ने चेतावनी दी कि ईरान पर किसी बड़े सैन्य हमले के परिणाम दूरगामी हो सकते हैं और इससे पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि बढ़ते संरक्षणवाद, भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और तकनीकी बदलाव के दौर में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मानव जीवन और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

