श्रीनगर | जम्मू-कश्मीर पुलिस ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी और श्रीनगर के पूर्व मेयर जुनैद अजीम मट्टू के खिलाफ सोशल मीडिया पर ‘गुमराह करने वाला कंटेंट’ फैलाने के आरोप में मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक, श्रीनगर के साइबर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत यह कार्रवाई की गई है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि इन नेताओं द्वारा साझा की गई सामग्री का उद्देश्य जनता में डर पैदा करना और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ना था। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि बिना सत्यापन के जानकारी फैलाना समाज की शांति और स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा है।
यह कानूनी कार्रवाई उस समय हुई है जब कश्मीर घाटी में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के विरोध में प्रदर्शनों का दौर जारी है। सुरक्षा कारणों से श्रीनगर और घाटी के कई हिस्सों में इंटरनेट की गति कम कर दी गई है और एहतियात के तौर पर 7 मार्च तक सभी शैक्षणिक संस्थान बंद कर दिए गए हैं। पुलिस का आरोप है कि इन नेताओं ने मौजूदा संवेदनशील परिस्थितियों का फायदा उठाते हुए ऐसी जानकारी साझा की जिससे अशांति फैलने की आशंका बढ़ गई। पुलिस प्रवक्ता ने नागरिकों को भी सलाह दी है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी पर ही भरोसा करें।
अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद आगा रूहुल्लाह ने कहा कि उन्हें जनता ने सच बोलने के लिए चुना है और यह अधिकार किसी एफआईआर से खत्म नहीं हो सकता। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अपनी आवाज उठाना बंद नहीं करेंगे। दूसरी ओर, पूर्व मेयर जुनैद मट्टू ने दावा किया कि ईरान के समर्थन में बोलने और सरकार की नीतियों की आलोचना करने के कारण उनकी सुरक्षा वापस ले ली गई है। दोनों नेताओं ने प्रशासन के इस कदम को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला करार दिया है, जिससे क्षेत्र में राजनीतिक पारा और अधिक गरमा गया है।

