
खंडवा। चिकित्सा जगत में अक्सर कहा जाता है कि डॉक्टर दवा देता है और ईश्वर ठीक करता है, लेकिन खंडवा के डॉ. अनिल पटेल इस कहावत को एक कदम आगे ले जाकर चरितार्थ कर रहे हैं। वे केवल शारीरिक व्याधियों का उपचार ही नहीं कर रहे, बल्कि अपने मरीजों को श्रीमद्भगवद्गीता की औषधि देकर उनकी आत्मा को भी बल प्रदान कर रहे हैं। पिछले दो वर्षों में डॉ. पटेल अब तक 105 परिवारों को नि:शुल्क गीता भेंट कर उनके जीवन में सकारात्मकता का उजाला फैला चुके हैं।
मां की आस्था बनी सेवा का आधार : डॉ. पटेल के इस अनूठे संकल्प की जड़ें उनके परिवार और उनकी माताजी की अगाध श्रद्धा में हैं। कुछ समय पूर्व उनकी माताजी ब्रेन हैमरेज जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ गई थीं। चिकित्सकीय प्रयासों और दृढ़ इच्छाशक्ति से जब वे स्वस्थ हुईं, तो उन्होंने अपना जीवन गीता को समर्पित कर दिया।
अद्भुत संकल्प: उनकी माताजी पिछले 2 वर्षों में 18 बार गीता का पूर्ण पाठ कर चुकी हैं। मां के इस आध्यात्मिक परिवर्तन ने डॉ. पटेल को यह महसूस कराया कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और पुरातन सनातन ज्ञान का समन्वय ही पूर्ण स्वास्थ्य की कुंजी है।
दवा के साथ दुआ का अनूठा क्लिनिक : बावडिय़ां काजी के मूल निवासी डॉ. पटेल का मानना है कि आज के दौर में अधिकांश बीमारियों की जड़ मानसिक तनाव और एकाकीपन है। चिकित्सा विज्ञान शरीर की रक्षा करता है, लेकिन गीता का ज्ञान आत्मा को निर्भय और वज्र के समान मजबूत बनाता है।
डॉ. पटेल का यह प्रयास उस दौर में एक मिसाल है जहाँ चिकित्सा क्षेत्र अक्सर व्यावसायिकता के आरोपों से घिरा रहता है। दवा के साथ गीता के ज्ञान का यह ‘कॉम्बिनेशन’ न केवल मरीजों का मनोबल बढ़ा रहा है, बल्कि समाज को अपनी जड़ों की ओर लौटने का संदेश भी दे रहा है।
अनुभव की जुबानी: क्या कहते हैं लाभार्थी?
= विक्रम सिंह : डॉक्टर साहब ने जब मुझे गीता भेंट की, तो लगा कि वे केवल बीमारी नहीं, बल्कि मेरे भीतर की चिंता को भी ठीक करना चाहते हैं। आज गीता पाठ से मेरे जीवन में गजब की शांति है।
=पीयूष गुप्ता : आजकल के दौर में जब डॉक्टर समय नहीं देते, तब डॉ. पटेल ने मुझे जीवन जीने की कला सिखाई। उनके द्वारा भेंट की गई गीता मेरे लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
