नई दिल्ली | आज से शुरू हो रहे फीफा विश्व कप 2026 को लेकर भारत के 30 करोड़ से अधिक फुटबॉल प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह है, लेकिन साथ ही एक टीस भी है कि उनकी अपनी टीम इस वैश्विक मंच पर नहीं है। 140 करोड़ की जनसंख्या वाले देश का फुटबॉल रैंकिंग में 139वें स्थान पर होना खेल प्रेमियों के लिए निराशाजनक है। इतने बड़े प्रशंसक आधार के बाद भी भारत का फुटबॉल में पिछड़ना एक गंभीर आत्ममंथन का विषय बन गया है।
विकास की राह में बड़ी चुनौतियां
भारतीय फुटबॉल के इस स्तर के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जिनमें घरेलू लीगों में स्थिरता की कमी और जमीनी स्तर पर प्रतिभा विकास का अभाव मुख्य हैं। इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) जैसे प्रयासों के बावजूद, क्लबों द्वारा निवेश की कमी और कमजोर व्यावसायिक ढांचे ने विकास की गति को थाम रखा है। क्रिकेट की तुलना में फुटबॉल को प्रायोजकों और मीडिया से मिलने वाला सीमित सहयोग भी इसके विस्तार में एक बड़ी बाधा के रूप में खड़ा है।
सुधार की दिशा में ठोस कदम जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि फुटबॉल में भारत की स्थिति तभी सुधरेगी जब जमीनी स्तर पर अकादमियों और स्कूलों में निवेश को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें राष्ट्रीय ढांचे से जोड़ने के लिए एक दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता है। हालांकि भारत फुटबॉल के प्रति दीवानगी के मामले में देश का दूसरा सबसे बड़ा खेल है, लेकिन इसे विश्व स्तरीय बनाने के लिए बुनियादी ढांचे और निवेश में आमूल-चूल परिवर्तन करना ही एकमात्र विकल्प है।

