नयी दिल्ली, 17 फरवरी (वार्ता) कृषि निर्यात के क्षेत्र में देश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में भारत के अनार को पहली बार समुद्री रास्ते से ऑस्ट्रेलिया के बाजार में प्रवेश मिला है जिनमें सांगोला और भगवा किस्म के अनार शामिल हैं।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की सोमवार की एक विज्ञप्ति के अनुसार कृषि और प्रसंस्करण खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने एग्रोस्टार और के बी एक्सपोर्ट्स के साथ मिलकर समुद्र के रास्ते ऑस्ट्रेलिया को प्रीमियम सांगोला और भगवा अनार की पहली खेप परीक्षण के तौर पर आस्ट्रेलिया भेजी है। विज्ञप्ति में भारत के ताजा कृषि उत्पादों के निर्यात बाजार के विस्तार की दिशा में इसे एक बड़ी सफलता बताया गया है।
उल्लेखनीय है कि आस्ट्रेलिया को अनार का निर्यात करने की छूट के लिए पिछले साल फरवरी उसके साथ एक कार्ययोजना और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पर हस्ताक्षर किए गए थे। एपीडा और राष्ट्रीय पादप संरक्षण संगठन (एनपीपीओ) द्वारा बाजार प्रवेश की ओर से व्यवस्थाएं पूरी कर लिए जाने के बाद जुलाई 2024 में आस्ट्रेलिया को वायु मार्ग से अनार की पहली हवाई खेप भेजी गई।
उस खेप से वहां के बाजार में अनार की मांग का आकलन किया गया और उसके बारसमुद्री खेप भेजी गई है। समुद्र से माल भेजने में लागत कम आती है।
एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव कहा, “भारत का कृषि निर्यात परिदृश्य अभूतपूर्व गति से बढ़ रहा है, जिसमें ताजे फलों का निर्यात साल-दर-साल 29 प्रतिशत बढ़ रहा है। अकेले अनार में 20 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, जो इस सेगमेंट की अपार संभावनाओं को दर्शाता है। एएनएआरएनईटी जैसी उन्नत पता लगाने वाली प्रणालियों के माध्यम से हम सुनिश्चित करते हैं कि भारतीय कृषि उत्पाद उच्चतम वैश्विक मानकों को पूरा करते हैं, जिससे दुनियाभर में उपभोक्ता का विश्वास बढ़ता है।”
समुद्र के रास्ते अनार की पहली खेप गत दिसंबर भारत से निकाली गयी और 13 जनवरी को सिडनी पहुंची। इसमें महाराष्ट्र के सोलापुर क्षेत्र में उत्पन्न 5.7 टन अनार थे, जिन्हें तीन तीन किलोग्राम के 1,900 बक्सों में पैक किया गया था। इसी तरह भगवा किस्म के अनार की 1,872 पेटियों में कुल 6.56 टन अनार की वाणिज्यिक खेप समुद्री मार्ग से छह जनवरी को ब्रिस्बेन पहुंची थी।
मंत्रालय का कहना है कि आस्ट्रेलिया को समुद्रीय मार्ग से अनार के निर्यात में यह यह सफलता न केवल गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में भारत की क्षमताओं को रेखांकित करता है, बल्कि नए बाजार खुलने से भारतीय किसानों के लिए महत्वपूर्ण नए अवसर भी मिले हैं।
