“वस्तु निर्यात क्षेत्र ने जनवरी में गिरावट के बावजूद मजबूती दिखायी है’

नयी दिल्ली, 17 फरवरी (वार्ता) देश के निर्यातकों के शीर्ष फोरम फियो ने जनवरी में वाणिज्यिक वस्तुओं के निर्यात में गिरावट के लिए जिंसों और धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ प्रशुल्क- युद्ध और विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव जैसे चल रहे व्यापार-व्यवधानों को जिम्मेदार ठहराया है।

जनवरी 2025 में व्यापारिक निर्यात में वार्षिक आधार पर 2.4 प्रतिशत की गिरावट पर फियो अध्यक्ष अश्विनी कुमार ने सोमवार को कहा व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कुछ रणनीतिक उपायों की जरूरत है।

फियो अध्यक्ष ने सरकार से ब्याज समानीकरण योजना को जारी रखने, अनुसंधान एवं विकास के लिए सहायता, विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त भारतीय शिपिंग लाइन के निर्माण और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से संबंधित निर्यात चुनौतियों के समाधान का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में निर्यात क्षेत्र में वृद्धि के लिए ये कदम महत्वपूर्ण हैं।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार जनवरी 2025 में वाणिज्यक वस्तुओं के निर्यात में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 2.4 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई और निर्यात 36.43 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।

श्री कुमार ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत के निर्यातकों ने 36.43 अरब डॉलर का निर्यात हासिल करके अपनी मजबूती दिखायी है।

उन्होंने हालांकि, आयात में उल्लेखनीय वृद्धि पर चिंता व्यक्त की, जो जनवरी 2024 में 53.88 अरब डॉलर से बढ़कर 59.42 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। उन्होंने कहा कि आयात में इस उछाल के साथ-साथ बढ़ते व्यापार घाटे के संभावित प्रभावों को लेकर चिंता है।

इंजनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद ( ईईपीसी) इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने जनवरी के निर्यात के आंकड़ों पर कहा, ‘बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारत के इंजीनियरिंग निर्यात में मजबूती बनी रही और इंजीनियरिंग सामानों का निर्यात 9.41 अरब डॉलर रही, जो पिछले साल इसी महीने में 8.76 अरब डॉलर की तुलना में साल-दर-साल 7.4 प्रतिशत अधिक है।

भारतीय इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए यह लगातार नौवां महीना है, जिसमें सकारात्मक वृद्धि हुई है जो दर्शाती है कि निर्यातक समुदाय ने बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य के साथ किसी प्रकार से तालमेल बिठाने में सफल है और चुनौतियों का सामना कर रहा है।

संचयी आधार पर, चालू वित्त वर्ष 2024-25 की अप्रैल-जनवरी अवधि में इंजीनियरिंग निर्यात साल-दर-साल 9.8 प्रतिशत बढ़कर 96.74 अरब डॉलर हो गया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 88.09 अरब डॉलर था।

ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन श्री चड्ढा ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हाल ही में अमेरिका यात्रा से व्यापार वार्ता के लिए अनुकूल माहौल बना है, जिससे पता चलता है कि ट्रम्प प्रशासन की ओर से टैरिफ का कोई खतरा नहीं है। यह काफी महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, क्योंकि भारत के इंजीनियरिंग निर्यात के लिए अमेरिका सबसे बड़ा गंतव्य है।

उन्होंने कहा, “ हम इस बात को लेकर आशान्वित हैं कि भारत और अमेरिका इस साल के अंत तक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर लेंगे और इसलिए आगे निर्यात परिदृश्य के बारे में आशावादी बने हुए हैं। ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ अन्य द्विपक्षीय व्यापार समझौतों की प्रतीक्षा है।

 

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