नयी दिल्ली, 02 मार्च (वार्ता) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा में आये अधिकारियों को सहयोग के माध्यम से संस्थागत समन्वय को सुदृढ़ करते हुए विकसित भारत 2047 की समग्र दृष्टि के अनुरूप निर्णय लेने चाहिए।
श्रीमती मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में सोमवार को उनसे मिलने आये राज्य सिविल सेवाओं से भर्ती और लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के 128वें प्रेरण प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा, “भारतीय प्रशासनिक सेवा में आपका प्रवेश आपके जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह पदोन्नति केवल पद परिवर्तन नहीं, बल्कि शासन के एक व्यापक क्षेत्र में प्रवेश है, जहाँ राष्ट्रीय दृष्टिकोण, गहरी दूरदृष्टि और लोकसेवा के मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की आवश्यकता है। आपकी जिम्मेदारियां जिला या राज्य की सीमाओं से कहीं आगे बढ़ चुकी हैं और इसलिए अपेक्षा है कि आप विभागीय सीमाओं से ऊपर उठकर सहयोग के जरिए संस्थागत समन्वय को सुदृढ़ करेंगे और विकसित भारत 2047 की समग्र दृष्टि के अनुरूप निर्णय लेंगे।”
उन्होंने कहा “जो भी अधिकारी आज मुझसे मिलने आये हैं और उनका राज्य सिविल सेवाओं में लगभग दो दशकों का अनुभव है और उन्हें जमीनी सच तथा प्रशासनिक तंत्र की गहरी समझ है। आपने समुदायों के साथ कार्य करते हुए विकास को आगे बढ़ाया है। अब आप पूरे राष्ट्र में शासन के मानकों के संरक्षक हैं। ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को मार्गदर्शक बनाकर नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन करें, समावेशी विकास सुनिश्चित करें, वंचित और कमजोर वर्गों तक लाभ पहुँचाएँ तथा सतत विकास और जलवायु अनुकूल शासन को बढ़ावा दें।”
उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी और नवाचार में अभूतपूर्व गति से बदलाव आ रहा हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधान, ई-गवर्नेंस, डिजिटल शिकायत निवारण और रियल-टाइम विश्लेषण को अपनाएँ, परंतु उन्हें मानवीय संवेदनशीलता और विवेकपूर्ण निर्णय के साथ संयोजित करें। अपने दायित्वों का निर्वहन अटूट ईमानदारी, पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ करें, तथा अधिकार का प्रयोग सहानुभूति और निष्पक्षता से करें। साथ ही अपने शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए राष्ट्र की आशाओं पर खरा उतरने का संकल्प लें।”
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में इन अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अब उन पर जिला या राज्य स्तर की प्राथमिकताओं से कहीं अधिक व्यापक जिम्मेदारियां हैं। इन व्यापक जिम्मेदारियों के लिए विभागीय सीमाओं से परे एक दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो प्रशासनिक बाधाओं को दूर करे। सहयोगात्मक रूप से कार्य करके वे संस्थागत सामंजस्य बढ़ा सकते हैं और शासन-तंत्र को सुदृढ़ कर सकते हैं। विकासात्मक परिणामों को गति देने और लोक सेवा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए उनकी सामूहिक कुशलता, समन्वय और प्रतिबद्धता आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वे अब किसी विशेष क्षेत्र के प्रशासक नहीं हैं। अब वे शासन मानकों के संरक्षक हैं जिन्हें पूरे राष्ट्र में बनाए रखना होगा। उनके द्वारा लिया गया प्रत्येक निर्णय 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की समग्र दृष्टि के अनुरूप होना चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि आईएएस अधिकारी होने के नाते, उनसे यह अपेक्षा की जाएगी कि वे जनता की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करें। उन्होंने बताया कि उनका बहुमूल्य अनुभव और ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना, कठिन और जटिल चुनौतियों का सामना करने में उनके लिए मार्गदर्शन का स्रोत बनेगी।
श्रीमती मुर्मु ने राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में उनकी भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अब उन पर जिला या राज्य स्तर की प्राथमिकताओं से कहीं अधिक व्यापक जिम्मेदारियां हैं। इन व्यापक जिम्मेदारियों के लिए विभागीय सीमाओं से परे एक दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो प्रशासनिक बाधाओं को दूर करे। सहयोगात्मक रूप से कार्य करके वे संस्थागत सामंजस्य बढ़ा सकते हैं और शासन-तंत्र को सुदृढ़ कर सकते हैं। विकासात्मक परिणामों को गति देने और लोक सेवा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए उनकी सामूहिक कुशलता, समन्वय और प्रतिबद्धता आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वे अब किसी विशेष क्षेत्र के प्रशासक नहीं हैं। अब वे शासन मानकों के संरक्षक हैं जिन्हें पूरे राष्ट्र में बनाए रखना होगा। उनके द्वारा लिया गया प्रत्येक निर्णय 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की समग्र दृष्टि के अनुरूप होना चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि आईएएस अधिकारी होने के नाते, उनसे यह अपेक्षा की जाएगी कि वे जनता की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करें। उन्होंने बताया कि उनका बहुमूल्य अनुभव और ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना, कठिन और जटिल चुनौतियों का सामना करने में उनके लिए मार्गदर्शन का स्रोत बनेगी।
