
छतरपुर। जिले में गेहूं उपार्जन पंजीयन को लेकर किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पंजीयन की अंतिम तिथि 7 मार्च नजदीक है, लेकिन राजस्व विभाग की सुस्ती और जियो-ट्रैकिंग प्रणाली की तकनीकी खामियों के कारण बड़ी संख्या में किसान अब तक पंजीयन नहीं करा पाए हैं।
जानकारी के अनुसार जिले में फसल गिरदावरी का लगभग 90 प्रतिशत कार्य शेष है। यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो करीब 8,000 किसान गेहूं उपार्जन पंजीयन से वंचित रह सकते हैं। इस वर्ष गेहूं की बंपर पैदावार के बावजूद किसान प्रक्रिया संबंधी उलझनों में फंसे हुए हैं।
नई जियो-ट्रैकिंग व्यवस्था में खसरा नंबर पर खेत की बजाय तालाब या मकान की लोकेशन दर्ज हो रही है। पहले 1850 मीटर तक की दूरी मान्य थी, लेकिन अब शून्य मीटर की सटीक लोकेशन अनिवार्य कर दी गई है, जिससे गिरदावरी और पंजीयन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
किसान सहकारिता समितियों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। किसानों ने मांग की है कि तकनीकी खामियां दूर की जाएं या पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए, ताकि वे अपनी फसल सरकारी उपार्जन में बेच सकें।
