एनसीईआरटी के पुराने जानकार ने एक और किताब में लिखे पैराग्राफ को अदालत में चुनौती दी

नयी दिल्ली, 28 फरवरी (वार्ता) राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के एक पुराने जानकार ने अब कक्षा 8वीं की एक और किताब के एक पैराग्राफ को चुनौती देने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाला बताया गया है।

यह नयी याचिका एनसीईआरटी के एक पुराने वरिष्ठ फेलो ने दाखिल की है, जिसमें 2007 से 2026 तक पूरे देश में पढ़ाई जाने वाली पाठ्यपुस्तक के सामाजिक और राजनीतिक जीवन-3 के एक पैराग्राफ पर सवाल उठाया गया है।

इस याचिका में एक वाक्य पर सवाल उठाया गया है जिसमें कहा गया है कि “हाल के फैसलों में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को शहर में कब्जा करने वाला माना जाता है।” याचिकाकर्ता के अनुसार यह चित्रण अदालत के बेदखली के फैसलों को चुनिंदा तरीके से दिखाता है और झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को सिर्फ “अतिक्रमणकारी” बताने का जोखिम उठाता है, बिना यह बताए कि ऐसे फैसले किस बड़े संवैधानिक ढांचे के तहत लिए जाते हैं।

याचिका में तर्क दिया गया है कि संवैधानिक अदालत को अक्सर एक-दूसरे के अधिकारों, कानूनी आदेशों और जनहित के विचारों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। बेदखली के न्यायशास्त्र को इस संदर्भ में न रखकर पाठ्यपुस्तक छात्रों के लिए एकतरफा धारणा बनाती है और न्यायपालिका में लोगों का भरोसा कमजोर कर सकती है।

याचिकाकर्ता ने कहा है कि वह पहले एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक बनाने की प्रक्रिया में शामिल था और वह शैक्षणिक सामग्री का सह-लेखक और अनुवादक था। उसका कहना है कि उसने अदालत से विरोध करने वाली भूमिका में नहीं बल्कि स्कूल के सिलेबस में संवैधानिक मूल्यों की सुरक्षा में मदद करने के लिए प्रतिभागी के तौर पर संपर्क किया है।

 

 

Next Post

सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के तीन दोषियों को मिली आखरी सांस तक जेल

Sat Feb 28 , 2026
नर्मदापुरम। न्याय व्यवस्था ने एक बार फिर कड़ा संदेश देते हुए मानवता को शर्मसार करने वाले अपराधियों को उनके किए की कड़ी सजा सुनाई है। कोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म के बाद एक महिला की निर्मम हत्या करने के मामले में तीन दोषियों को अंतिम सांस तक जेल में रहने की […]

You May Like

मनोरंजन