नयी दिल्ली, 28 फरवरी (वार्ता) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि बोत्सवाना से आये नौ और चीतों को मध्य प्रदेश में स्थित कुनो राष्ट्रीय उद्यान में बने संगरोध बाड़ों में छोड़ा गया है। श्री यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर शनिवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि इन चीतों को पहले अनुकूलन और स्वास्थ्य निगरानी के चरण से गुजरना होगा। उनका कहना था कि बोत्सवाना से जो नौ चीते लाये गये हैं उनमें छह मादा और तीन नर हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पर्यावरण के प्रति जागरूक नेतृत्व में चीता परियोजना को बहुत बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि भारत में 39 चीतों की अच्छी-खासी आबादी है, जिनमें 28 भारत में जन्मे शावक शामिल हैं। इनमें एक शावक कल शुक्रवार को ही जन्मा है जबकि तीन अन्य इससे चंद दिन पहले जन्मे थे।।
श्री यादव की घोषणा के अनुसार नौ और चीते बोत्सवाना से लाए गये इस तरह से चीतों की संख्या 48 हो गई है। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के पर्यावरण के प्रति जागरूक नेतृत्व में चीता परियोजना को बड़ी सफलता मिली है। उनका कहना था कि भारत में 39 चीतों की अच्छी-खासी आबादी हो गयी है, जिनमें 28 भारत में जन्मे शावक शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दिसंबर 2024 में सरकार ने चीतों की खरीद के लिए बोत्सवाना सरकार के साथ औपचारिक बातचीत शुरू की, ताकि भारत के प्रमुख वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम ‘प्रोजेक्ट चीता’ को और मजबूत किया जा सके। यह प्रस्ताव बोत्सवाना गणराज्य के पर्यावरण और पर्यटन मंत्री पुसो विंटर ममोलोत्सी के साथ परामर्श से श्री यादव द्वारा औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया गया था। उनका कहना था कि चीता पुनर्प्रवेश योजना के तहत बोत्सवाना ने भारत के साथ साझेदारी करने पर सहमति जताई। यह सहयोग वैश्विक चीता संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने और अफ्रीका में इसके पारंपरिक क्षेत्र से बाहर इस प्रजाति की एक अतिरिक्त सुरक्षित आबादी बनाने की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जिससे इसकी दीर्घकालिक सहनशीलता में वृद्धि होगी। इस साझेदारी को क्रियान्वयित करने के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने गत वर्ष सितंबर में बोत्सवाना का दौरा किया था जिसका मकसद अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव स्थानांतरण मानकों के अनुरूप परिचालन तौर-तरीकों, परिवहन व्यवस्था और नियामक स्वीकृतियों का प्रारूप तैयार करना था। उचित वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद, बोत्सवाना के ग़ांज़ी क्षेत्र से इन चीतों की पहचान करते हुए उन्हें पकड़ा गया। बाद में, पशु चिकित्सा की निरंतर निगरानी में चीतों को लगभग 700 किलोमीटर दूर सड़क मार्ग से गैबोरोन ले जाया गया।
नवंबर में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बोत्सवाना की यात्रा पर गयी तो चीतों को औपचारिक रूप से भारत सरकार को सौंप दिया गया। उन्हें मोकोलोडी प्रकृति अभ्यारण्य में संगरोध बाड़ों में छोड़ दिया गया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने नवंबर में संगरोध व्यवस्था की समीक्षा करने, बाड़ों की स्थिति का आकलन करने और अंतरराष्ट्रीय स्थानांतरण की तैयारियों को सुनिश्चित करने के लिए बोत्सवाना का दौरा किया और दिसंबर में, बोत्सवाना प्रतिनिधिमंडल ने अंतिम लॉजिस्टिक्स संबंधी तैयारियों की समीक्षा करने और मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में जारी चीता संरक्षण प्रयासों का अवलोकन करने के लिए भारत का दौरा किया। उन्होंने बताया कि कल फरवरी को इन चीतों को मोकोलोडी प्रकृति अभ्यारण्य से गैबोरोन हवाई अड्डे तक ले जाया गया। भारतीय वायु सेना के सहयोग से, चीतों को नियंत्रित और निगरानी वाले वातावरण में ग्वालियर लाया गया ताकि यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित हो सके। भारत पहुंचने पर, चीतों को हेलीकॉप्टर द्वारा कुनो राष्ट्रीय उद्यान में स्थानांतरित कर दिया गया।

