नई दिल्ली | डिजिटल क्रांति के इस दौर में ‘जीरो ब्रोकरेज डीमैट अकाउंट’ नए निवेशकों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो रहा है। पारंपरिक ब्रोकिंग के विपरीत, इस मॉडल में शेयर खरीदने या बेचने पर लगने वाला भारी कमीशन पूरी तरह शून्य होता है। यह सुविधा विशेष रूप से उन छोटे निवेशकों और छात्रों के लिए वरदान है जो कम पूंजी के साथ बाजार में प्रवेश करना चाहते हैं। अब ब्रोकरेज शुल्क की चिंता किए बिना निवेशक अपनी पसंद के शेयरों में बार-बार लेन-देन कर सकते हैं, जिससे ट्रेडिंग की लागत में भारी कमी आई है और आम आदमी के लिए निवेश के रास्ते खुले हैं।
टेक्नोलॉजी के विस्तार ने डीमैट खाता खोलने की प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस और त्वरित बना दिया है। कोई भी व्यक्ति अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक विवरण के माध्यम से मोबाइल ऐप पर कुछ ही मिनटों में केवाईसी (KYC) प्रक्रिया पूरी कर सकता है। कई आधुनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म अब यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस और वीडियो वेरिफिकेशन की सुविधा दे रहे हैं, जिससे घर बैठे ही खाता सक्रिय हो जाता है। ब्रोकर का चुनाव करते समय निवेशकों को ऐप की रेटिंग, पारदर्शिता और सक्रिय ग्राहकों की संख्या पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि उनका निवेश सुरक्षित रहे।
भले ही ब्रोकरेज शुल्क शून्य हो, लेकिन निवेशकों को अन्य वैधानिक खर्चों के प्रति सचेत रहना चाहिए। इसमें एनुअल मेंटेनेंस चार्ज (AMC), सेबी शुल्क, ट्रांजैक्शन चार्ज और जीएसटी जैसे खर्च शामिल होते हैं जो प्रत्येक ट्रेड पर लागू हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश शुरू करने से पहले अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करना और बाजार के उतार-चढ़ाव को समझना अनिवार्य है। बिना किसी डर के ट्रेडिंग करने की यह स्वतंत्रता भविष्य में बेहतर मुनाफा कमाने में सहायक हो सकती है, बशर्ते निवेश सोच-समझकर और शोध के साथ किया जाए।

