
सिंगरौली। जिले के मोरवा क्षेत्र में एक विस्थापित महिला को अपने हक के मुआवजे की राशि के लिए पिछले दो महीनों से दर-दर भटकना पड़ रहा है। पीड़िता का आरोप है कि एनसीएल के मुख्यालय में लगातार चक्कर लगाने के बावजूद अब तक उन्हें मुआवजा नहीं मिला। उल्टा, जब उन्होंने अधिकारियों से अपनी समस्या रखी तो कार्यालय में पदस्त अधिकारी ने सिक्योरिटी बुलाकर उन्हें परिसर से बाहर करवा दिया।
पीड़ित महिला के अनुसार, भूमि अधिग्रहण के एवज में मिलने वाली मुआवजा राशि अब तक लंबित है। वे बीते दो माह से लगातार एनसीएल मुख्यालय पहुंच रही हैं, लेकिन कभी फाइल अधूरी होने की बात कही जाती है तो कभी संबंधित अधिकारी के उपलब्ध न होने का हवाला देकर लौटा दिया जाता है।
महिला ने बताया कि उनकी बेटी की शादी नजदीक है और आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो चुकी है। इसी को लेकर परसों वे अपने परिजनों के साथ मुख्यालय पहुंचीं और अधिकारियों से मानवीय आधार पर भुगतान की गुहार लगाई। आरोप है कि उनकी बात सुनने के बजाय प्रबंधन ने कार्यालय की सिक्योरिटी बुला ली, जिसके बाद उन्हें परिसर से बाहर कर दिया गया।
इस घटना के बाद क्षेत्र में नाराजगी का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विस्थापित परिवार पहले ही अपनी जमीन और आजीविका खो चुका है, ऐसे में यदि अपने अधिकार के लिए आवाज उठाने पर भी उन्हें इस तरह अपमानित किया जाए, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही है। फिलहाल इस पूरे मामले में एनसीएल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर शीघ्र मुआवजा भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की है।
