काबुल (पज्हवोक) अफगानिस्तान के कई प्रमुख नेताओं ने अफगान क्षेत्र पर पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई की तीखी आलोचना करते हुए कहा है कि इस्लामाबाद हिंसा के जरिए अपनी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता। उन्होंने जोर दिया कि अफगान जनता हर परिस्थिति में राष्ट्रीय एकता के साथ अपने देश की रक्षा करेगी। रिपोर्ट के अनुसार, गत शनिवार रात पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने पक्तिका प्रांत के एक मदरसे और नंगरहार के बिहसूद जिले में एक रिहायशी मकान पर हवाई हमले किए। बिहसूद हमले में महिलाओं और बच्चों समेत एक ही परिवार के 17 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। जवाबी कार्रवाई में इस्लामिक अमीरात की सेनाओं ने गुरुवार रात डूरंड रेखा के पार पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अफगान रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इन घटनाओं में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए तथा दो ठिकानों और 19 चौकियों पर कब्जा किया गया। मंत्रालय ने यह भी बताया कि पाकिस्तानी रॉकेट हमले में आठ अफगान मुजाहिदीन मारे गए और 11 घायल हुए । नंगरहार के एक शरणार्थी शिविर में महिलाओं और बच्चे समेत 13 नागरिक घायल हुए।
इस्लामिक अमीरात के मुख्य प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने दावा किया कि पाकिस्तान ने कंधार और पक्तिया सहित कई क्षेत्रों में बमबारी की, हालांकि इन हमलों में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा कि अफगानी एकजुट होकर अपने देश की रक्षा करेंगे और साहसपूर्वक जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बमबारी और हिंसा के माध्यम से अपनी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता है। पाकिस्तान में पूर्व अफगान राजदूत अब्दुल सलाम ज़ईफ़ ने इस्लामाबाद की नीतियों की आलोचना करते हुए पाकिस्तानी नेतृत्व और विद्वानों से “अनावश्यक अहंकार” पर नियंत्रण रखने और क्षेत्र को अस्थिर करने वाली सैन्य कार्रवाइयों से बचने का आग्रह किया। पूर्व राष्ट्रपति के सलाहकार ज़ियाउल हक अमरखाइल ने कहा कि पाकिस्तान पिछले 40 वर्षों से अफगानिस्तान के खिलाफ “अघोषित युद्ध” चला रहा है। हालांकि युद्ध समाधान नहीं है, लेकिन अफगानिस्तान की रक्षा और जवाबी कार्रवाई आवश्यक है। पूर्व मेषरानो जिरगा (सीनेट) अध्यक्ष फ़ज़ल हादी मुस्लिमयार ने हमलों की निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की मांग की। उन्होंने कहा, “ऐसे हमले अफगान हवाई क्षेत्र का उल्लंघन हैं। अफगानिस्तान एक स्वतंत्र देश है और उसकी संप्रभुता को कोई चुनौती नहीं दे सकता।” ईरान के पूर्व राजनयिक सईद रसूल मौसवी ने इन झड़पों को ” दुखद” बताया और शत्रुता समाप्त कर शांति स्थापित करने की अपील की। उधर, संयुक्त राष्ट्र महासचिव, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के अफगानिस्तान पर विशेष प्रतिवेदक और ईरान के विदेश मंत्री ने भी अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव तत्काल कम करने की अपील की है।

