नई दिल्ली | विश्व व्यापार संगठन (WTO) में भारत की आठवीं व्यापार नीति समीक्षा (TPR) जुलाई 2026 में आयोजित होने जा रही है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस समीक्षा में भारत की राष्ट्रीय व्यापार नीतियों का व्यापक मूल्यांकन किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण आयोजन से पहले ही भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी व्यापार सुगमीकरण उपलब्धियों और डिजिटल सीमा शुल्क सुधारों का प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि भारत ने न केवल WTO के व्यापार सुगमीकरण समझौते (TFA) की अपनी 100 प्रतिशत प्रतिबद्धताओं को समय सीमा के भीतर पूरा किया है, बल्कि अब वह ‘टीएफए प्लस’ जैसे उन्नत उपायों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
राष्ट्रीय व्यापार सुगमीकरण कार्य योजना (NTFAP 3.0) के तहत भारत का लक्ष्य वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना है। हाल ही में जिनेवा में आयोजित सत्रों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सीमा शुल्क सुधारों में ‘होल-ऑफ-गवर्नमेंट’ दृष्टिकोण पर जोर दिया। इसका मुख्य उद्देश्य एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है जो पूरी तरह से चेहरा रहित (Faceless), संपर्क रहित (Contactless) और कागज रहित (Paperless) हो। इस आधुनिक प्रणाली के माध्यम से व्यापारियों, सीमा शुल्क अधिकारियों, बैंकों और रसद ऑपरेटरों को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ा गया है, जिससे दस्तावेज़ीकरण की प्रक्रिया आसान और पारदर्शी हो गई है।
जिनेवा के सत्रों में लगभग 40 देशों के प्रतिनिधियों ने भारत के अनुभवों में गहरी रुचि दिखाई, जो वैश्विक स्तर पर बढ़ती भारत की साख का प्रमाण है। सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण से न केवल लेन-देन की लागत में कमी आई है, बल्कि क्लीयरेंस समय में भी काफी तेजी देखी गई है। इससे पहले भारत की सातवीं समीक्षा जनवरी 2021 में हुई थी। अब आगामी 2026 की समीक्षा भारत के लिए अपनी पारदर्शी व्यापार नीतियों और सुधारे गए कारोबारी माहौल को दुनिया के सामने पेश करने का एक बड़ा अवसर होगी, जो भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) का प्रमुख केंद्र बनाएगी।

