एकलव्य संस्था द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित

शाहपुर। ऑरेकल के सहयोग से एकलव्य संस्था, शाहपुर द्वारा 26 फरवरी 2026 को महिला एवं बाल विकास विभाग, शाहपुर कार्यालय में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में शाहपुर ब्लॉक के चयनित 20 ग्रामों—धँसाई, बोड़ीपानी, जामुनढाना, सालीमेंट, गुरगुंदा-1, गुरगुंदा-2, पहावाड़ी-2, रायपुर-2, पावरझंडा, रानापुरा, डेंडुपुरा, धपाड़ा माल, नवरंगढाना, भातना, चिरमाटेकरी, हांडीपानी, झापड़ी (कालापानी), बानाबेहड़ा, कछार एवं मगरडोह—की 20 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की।

 

*स्कूल रेडीनेस को मजबूत करने पर रहा फोकस*

 

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की क्षमता का विकास करते हुए बच्चों की ‘स्कूल रेडीनेस’ को सुदृढ़ करना रहा। विशेष रूप से प्रारंभिक गणितीय अवधारणाओं को अनुभव-आधारित और गतिविधि-आधारित पद्धति के माध्यम से विकसित करने पर गहन चर्चा की गई।

प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि विद्यालय में प्रवेश के समय बच्चों के सामने आने वाली चुनौतियों में वर्गीकरण, तुलना, क्रमबद्धता और पैटर्न पहचान जैसी आधारभूत गणितीय क्षमताओं की कमी प्रमुख होती है। यदि इन कौशलों को प्रारंभिक स्तर पर खेल और अनुभव के माध्यम से विकसित किया जाए, तो बच्चों की संज्ञानात्मक नींव अधिक मजबूत बनती है और वे विद्यालयी शिक्षा को सहजता से ग्रहण कर पाते हैं।

 

*‘पशु’ थीम के माध्यम से गणितीय अवधारणाओं का विकास*

 

प्रशिक्षण में ‘पशु’ थीम को गणितीय अवधारणाओं के विकास के लिए एक प्रभावी और समग्र माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया। यह साझा किया गया कि जब सीखने की प्रक्रिया बच्चों के अनुभव संसार से जुड़ती है, तो उनकी भागीदारी और समझ दोनों में वृद्धि होती है।

पशुओं के चित्रों, खिलौनों और स्थानीय सामग्रियों के माध्यम से विभिन्न गतिविधियाँ कराई गईं। इनमें पालतू और जंगली पशुओं का वर्गीकरण, चार पैर और दो पैर वाले पशुओं को अलग-अलग समूहों में बाँटना तथा छोटे और बड़े पशुओं की तुलना करना शामिल था। इन गतिविधियों के जरिए यह विश्लेषित किया गया कि वर्गीकरण बच्चों की तार्किक सोच और अवधारणा निर्माण की आधारशिला है।

 

*स्थानीय संसाधनों से सीखने को बनाया गया जीवंत*

 

समूह चर्चा और अनुभव साझा करने की प्रक्रिया से यह निष्कर्ष सामने आया कि यदि गणितीय अवधारणाओं को थीम-आधारित और संदर्भित रूप में प्रस्तुत किया जाए, तो उनका प्रभाव अधिक गहरा और स्थायी होता है। स्थानीय एवं सुलभ सामग्रियों का उपयोग बच्चों की सक्रिय सहभागिता को बढ़ाता है और सीखने की प्रक्रिया को जीवंत तथा आनंददायक बनाता है।

प्रशिक्षण में यह भी रेखांकित किया गया कि प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा में खेल-आधारित और अनुभवात्मक शिक्षण पद्धति अत्यंत प्रभावी है। जब बच्चे गतिविधियों के माध्यम से स्वयं खोजते और समझते हैं, तो उनकी जिज्ञासा और आत्मविश्वास दोनों बढ़ते हैं।

 

*प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधार की दिशा में पहल*

 

कार्यक्रम के सफल संचालन में एकलव्य शाहपुर टीम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सक्रिय सहभागिता सराहनीय रही। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की प्रारंभिक गणितीय समझ को मजबूत करने में सहायक होंगी।

इस प्रकार के प्रशिक्षण बच्चों को विद्यालयी शिक्षा के लिए तैयार करने, उनकी बौद्धिक क्षमता को सुदृढ़ बनाने और प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सार्थक पहल सिद्ध हो रहे हैं।

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