
जबलपुर। कागजों में सड़क बनाकर भ्रष्टाचार किये जाने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि सड़क नहीं होने के कारण गांव वासियों को आवाजाही में परेशानी होती है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अनावेदक को हलफनामा में जबाव पेश करने के आदेश जारी किये है।
जबलपुर के ग्राम बरखेड़ा निवासी सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर राम किशन पटेल की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि सिमरिया-छापरी रोड निर्माण की स्वीकृति साल 2018 में मिली थी। जिसका निर्माण कार्य साल 2022 में कागजो पर पूर्ण हो गया था। सिमरिया-पौडी मार्ग पर सिमरिया-छापरी रोड का बोर्ड भी गला दिया गया था। गलत मार्ग में बोर्ड लगने के कारण राहगीरों को भटकना पडता है।
याचिका में कहा गया था कि कागजों में सड़क का निर्माण कर आवंटित राशि का बंदरबांट किया गया है। वास्तव में सड़क निर्माण नहीं किया गया है। जिसके कारण ग्रामवासी खेत के रास्ते आने जाने मजबूर है। सड़क मार्ग से जाने के लिए उन्हें 15 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। इस संबंध में ग्रामीणजनो तथा याचिकाकर्ता के द्वारा संबंधित अधिकारियों को शिकायत की गयी। शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गयी है। याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी करते हुए अगली सुनवाई 23 मार्च वाले सप्ताह में निर्धारित की है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पैरवी की।
