सिहोरा बलवा कांड: आरोपी दंगाइयों को जमानत नहीं

जबलपुर। सिहोरा आजाद चौक में विगत दिनों हुए बवाल व सामुदायिक हिंसा के मामले में अदालत ने आरोपियों की ओर से पेश किये जमानत आवेदन निरस्त कर दिये। उक्त आदेश सिहोरा जेएमएफसी न्यायालय ने जारी किये है।

अदालत के समक्ष शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक दिलावर धुर्वे एवं सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी अजय दुबेने बताया कि 19 फरवरी 2026 की रात्रि करीब 9.30 बजे जय ज्योति समिति आजाद चौक सिहोरा में माताजी की आरती हो रही थी। आरती में फरियादी अंकेश गुप्ता एवं अंकेश गुप्ता के साथ आदर्श गुप्ता, रामजी गुप्ता, स्वयं गुप्ता, ऋतु बर्मन, बनवारी गुप्ता, अंकित गुप्ता, सक्षम गुप्ता, राहुल गुप्ता एवं अन्य लोग मौजूद थे। उसी दौरान मदीना मस्जिद आजाद चौक सिहोरा के अंदर एवं बाहर से बहुत सारी भीड़ आ गई। जिसमें आरोपी साकिर मकरानी, ताहिर मकरानी, आबिद राईन, आशिक बाबा, समीर खान, आसमानी भाईजान, फरदीन, शादाब, नौशाद, अब्दुल, इमरान शाह, जावेद राईन, ओवेद राईन, नाशीर अंसारी, अनवर राईन, राजा मकरानी, समीर मकरानी, छोटू अंसारी, अशरफ मकरानी, हप्पू मछली वाला, तनवीर राईन एक राय होकर आये और फरियादी एवं सभी लोगों को गालियां देते हुए हाथ मुक्कों से मारपीट करने लगे। जिन्हें आरती कर रहे अन्य लोगों द्वारा समझाया गया। जिसके बाद कुछ देर तक विवाद शांत रहा इसके बाद वहीं पर मोहम्मद तौसीर, सोहेल शाह, अकरम शाह, मोहम्मद सिन्दबाज एवं अन्य बहुत सारे लोग खतरनाक रूप से ईंट पत्थर लेकर आये और पहले आई भीड में शामिल हो गये। आरोप है कि इसके बाद पुन: सभी लोग एक राय होकर मंदिर के और सभी लोगों के ऊपर ईंट पत्थरों से हमला कर दिया। मंदिर के सामने की स्टील की रैलिंग तोड़ दी एवं देवी देवताओं का अपमान करने लगे। जिससे सभी लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई है। तोडफ़ोड़ से मंदिर में काफी नुकसान हुआ है। कुछ देर बाद पुलिस बल आ जाने से सभी आरोपी लोग मौके से भागने लगे तथा कुछ लोग मस्जिद के अंदर छिप गये। पुलिस ने उक्त मामले में विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर आरोपियों को 20 फरवरी का न्यायिक अभिरक्षा में जेल में निरुद्व कराया है। जिस पर उक्त आरोपियों की ओर से जमानत पाने यह आवेदन पेश किये गये है। शासन की ओर से दलील दी गई कि आरोपीगण द्वारा एक वर्ग विशेष की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गयी एवं बहुत बड़ी मात्रा में पथराव किया। कुछ हिन्दू सामुदाय के लोग घायल हुये। यह आकस्मिक विवाद नहीं, बल्कि यह एक पूर्व नियोजित था। पूरे मामले का अवलोकन करने के बाद अदालत ने आरोपियों को जमानत देने से इंकार करते हुए उनके आवेदन निरस्त कर दिये।

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