श्रीनगर | ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और संभावित हमलों की आशंका को देखते हुए भारतीय दूतावास ने तेहरान में रह रहे अपने नागरिकों और छात्रों को तुरंत देश छोड़ने की सलाह दी है। दूतावास ने भारतीय छात्रों, तीर्थयात्रियों और व्यापारियों से उपलब्ध वाणिज्यिक उड़ानों का उपयोग कर जल्द से जल्द भारत लौटने को कहा है। हालांकि, जम्मू-कश्मीर के लगभग 2,000 से अधिक छात्र जो वहां के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे हैं, एक बड़ी दुविधा में फंस गए हैं। उर्मिया यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंस सहित कई संस्थान छात्रों को घर जाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं, जिससे छात्रों के बीच सुरक्षा और भविष्य को लेकर भारी बेचैनी देखी जा रही है।
परीक्षा और करियर बना घर वापसी में रोड़ा
ईरान की यूनिवर्सिटीज ने 5 मार्च को ‘उलूमपाया’ और ‘प्री-इंटर्नशिप’ जैसी महत्वपूर्ण नेशनल परीक्षाएं तय की हैं। छात्रों का आरोप है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन इन परीक्षाओं को टालने के लिए तैयार नहीं है। एक कश्मीरी छात्रा ने बताया कि अधिकारियों का कहना है कि यदि वे परीक्षा छोड़कर जाते हैं, तो उनका पूरा साल बर्बाद हो जाएगा और भविष्य में करियर पर बुरा असर पड़ेगा। जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि ईरानी अधिकारियों से बात कर परीक्षाओं को स्थगित कराया जा सके और छात्रों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित हो सके।
नेताओं की अपील और बिगड़ते हालात
ईरान में आंतरिक विरोध प्रदर्शनों और मौत की सजाओं के बीच सुरक्षा स्थिति लगातार बिगड़ रही है। श्रीनगर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने छात्रों से भावुक अपील करते हुए कहा है कि वे परीक्षा के चक्कर में न पड़ें और अपना बैग पैक कर तुरंत वापस आएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एयरस्पेस बंद हो गया, तो सरकार के लिए भी उन्हें निकालना नामुमकिन हो जाएगा। गौरतलब है कि पिछली बार भी एयरस्पेस बंद होने पर छात्रों के परिजन सड़कों पर उतर आए थे। फिलहाल, छात्र और उनके परिवार केंद्र सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं कि मंत्रालय उनके शैक्षणिक भविष्य और सुरक्षा के बीच कोई रास्ता निकाले।

