वॉशिंगटन: अमेरिका का 2025 में कुल व्यापार घाटा लगभग 901 अरब डॉलर रहा, जो 2024 की तुलना में थोड़ा कम जरूर हुआ, लेकिन अब भी बेहद ऊँचा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नए 10-15 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ लागू करने के बावजूद आयात-निर्यात के संतुलन में बड़ा बदलाव नहीं दिखा।आंकड़ों के अनुसार 2025 में निर्यात 6% और आयात लगभग 5% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि टैरिफ का असर कुल व्यापार से ज्यादा महंगाई और घरेलू मांग पर पड़ता है। चीन से आयात में कमी आई, लेकिन अमेरिका ने वियतनाम और ताइवान जैसे देशों से खरीद बढ़ाकर आपूर्ति शृंखला का स्रोत बदल लिया।विशेषज्ञों के अनुसार टैरिफ की लगभग 90% लागत अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं ने वहन की। उधर, सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व इमरजेंसी टैरिफ को अवैध ठहराए जाने के बाद भी नई दरें लागू की गईं, जिससे व्यापार नीति में अनिश्चितता बनी हुई है।
बाइडेन प्रशासन (2021-2024) के दौरान ट्रंप-युग के चीन पर लगाए गए सेक्शन-301 टैरिफ बड़े पैमाने पर बरकरार रखे गए। उस अवधि में लगभग 175 अरब डॉलर का टैरिफ राजस्व संग्रह हुआ। हालांकि व्यापार घाटा तब भी 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा, जिससे स्पष्ट है कि घाटा केवल टैरिफ नीति से नहीं, बल्कि व्यापक आर्थिक संरचना और घरेलू मांग पर निर्भर करता है।
विश्लेषकों का मानना है कि दोनों प्रशासन में टैरिफ नीति अलग अंदाज में लागू हुई, लेकिन व्यापार घाटे की मूल प्रवृत्ति में बड़ा बदलाव नहीं आया।
