नयी दिल्ली, 24 फरवरी (वार्ता) भारतीय सेना के ‘एलीट 2 पैरा’ के निडर और अत्यधिक प्रशिक्षित जर्मन शेफर्ड श्वान टायसन की हालत में सुधार हो रहा है।
इसे जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में ‘ऑपरेशन त्रिशी-I’ के दौरान गोली लगी थी। सेना ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
सेना के ह्वाइट नाइट कॉर्प्स ने एक्स पर पोस्ट में कहा, हाल ही में किश्तवाड़ में हुए ‘ऑपरेशन त्रिशी-1’ में ‘असॉल्ट डॉग टायसन’ ने असाधारण साहस दिखाया था और आतंकवादियों के ठिकाने में प्रवेश करते समय पहली गोली खायी। अपनी चोटों से बेपरवाह, उसने जोरदार हमले किये और आतंकवादियों को गोली चलाने के लिए मजबूर कर दिया। इससे उनकी उपस्थिति की पुष्टि हो गयी।”
पोस्ट में लिखा, “जख्मी होने के बावजूद बुलंद हौसले के साथ, सतर्क और तेजी से ठीक होता टायसन कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा की मिसाल है। वह हर मायने में असली योद्धा और सिपाही है। हमारी तलाश जारी है, जो शांति भंग करने की कोशिश करेंगे, उन्हें सिर छिपाने की कहीं जगह नहीं मिलेगी।”
इस पोस्ट में टायसन की तस्वीरें भी हैं। इसमें वह अपने हैंडलर के साथ लॉन में धूप का आनंद लेता और ठीक होता दिखाई दे रहा है। रविवार को टायसन उन आतंकवाद विरोधी अभियानों का एक अप्रत्याशित नायक बन गया, जो सुरक्षा बलों ने जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकवादियों को बाहर निकालने और मार गिराने के लिए चलाया था।
अधिकारियों ने कहा कि घायल कुत्ते को तुरंत हवाई मार्ग से चिकित्सा केंद्र ले जाया गया और उसकी हालत स्थिर बतायी जा रही है।
इससे पहले आतंकवाद विरोधी बल (सीआईएफ) डेल्टा के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल एपीएस बल ने ‘ऑपरेशन त्रिशी-I’ के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए टायसन की केंद्रीय भूमिका की जानकारी दी।
उन्होंने सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयासों पर जोर देते हुए कहा, “हमने बहुत ही शांत, संयमित, सामूहिक और सहयोगी तरीके से काम किया। यही कारण है कि हमें हमारे किसी भी सैनिक को कोई नुकसान पहुंचाए बिना इस तरह की सफलता मिली, सिवाय बहादुर कुत्ते टायसन के जिसने इस ऑपरेशन की शुरुआत की थी।”
