
अनूपपुर। देश की पहली किन्नर विधायक रहीं शबनम मौसी एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। इस बार उन पर जबरन लूटपाट और मारपीट का आरोप लगाया गया है। मामला अनूपपुर जिले के चचाई थाना क्षेत्र का है, जहां एक सब्जी व्यापारी ने मौसी पर सोने के झुमके छीनने और धमकी देने का आरोप लगाया है।
बेटे की बधाई में मांगे 21 हजार, नहीं मिले तो झुमका लूटने का आरोप
बाबू चौक अमलाई निवासी सब्जी व्यापारी राहुल कुमार सोनी ने शिकायत में बताया कि करीब चार महीने पहले उसके घर बेटे का जन्म हुआ था। इसी मौके पर शबनम मौसी 8 से 10 किन्नरों के साथ बधाई मांगने आई थीं। उन्होंने 21 हजार रुपए की मांग की जबकि राहुल की मां और पत्नी ने केवल 1100 रुपए दिए। इसके बाद शबनम मौसी ने बद्दुआएं देना शुरू कर दीं और उनकी मां को अपशब्द कहते हुए उनके कान से सोने का झुमका छीन लिया। झुमका उनकी नानी की निशानी थी। राहुल ने दावा किया कि जब वह झुमका वापस मांगने गया तो मौसी ने कहा पहले 21 हजार दो, फिर झुमका ले जाना।
शबनम मौसी ने लगाया उधारी का पलटवार आरोप
वहीं इस पूरे मामले पर शबनम मौसी ने आरोपों को खारिज करते हुए राहुल सोनी पर 50 हजार रुपये उधार लेने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि राहुल ने 4 साल पहले शादी के समय भी बधाई के पैसे बाद में दिए थे और अब बेटे के जन्म पर भी बहस कर रहा था। मौसी का कहना है मैं तो अपनी उधारी मांगने गई थी, उल्टा वही विवाद करने लगा। वायरल हो रहे वीडियो में एक किन्नर कैमरा बंद करने के लिए हाथ जोड़ते हुए भी नजर आ रही हैं।
पुलिस ने जांच में लिया मामला
चचाई थाना प्रभारी सुन्द्रेश सिंह मरावी ने बताया कि राहुल सोनी की ओर से शबनम मौसी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। आरोप लूटपाट और मारपीट का है। फिलहाल मामला जांच में है, अभी एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
शबनम मौसी: किन्नर समाज की प्रतीक और राजनीतिक इतिहास की अहम शख्सियत
शबनम मौसी का नाम देश के राजनीतिक इतिहास में पहली किन्नर विधायक के तौर पर दर्ज है। उन्होंने वर्ष 2000 में सोहागपुर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर राजनीति में इतिहास रच दिया था। यह सीट तत्कालीन कांग्रेस विधायक कृष्णपाल सिंह के निधन के बाद खाली हुई थी। उन्होंने भाजपा के लल्लू सिंह को 17,800 से अधिक वोटों से हराया था। हालांकि 2003 के विधानसभा चुनाव में उन्हें मात्र 1400 वोट मिले और वे चुनाव हार गईं। मौसी पहले नाच-गाकर और सामाजिक कार्यक्रमों में बधाई मांगकर जीवनयापन करती थीं, लेकिन जनता के आक्रोश और समर्थन के चलते राजनीति में आईं।
