मंडला: प्रदेश सरकार द्वारा धार्मिक नगरीय क्षेत्रों में एक अप्रैल से लागू की गई शराबबंदी मंडला में पूरी तरह फेल साबित हो रही है। नर्मदा तट पर बसे इस पवित्र नगर में न केवल शराब की खेप धड़ल्ले से पहुंच रही है, बल्कि गली–मोहल्लों में खुलेआम शराब का विक्रय और होम डिलेवरी तक का नेटवर्क खड़ा हो चुका है। हालत यह है कि सुराप्रेमियों के एक फोन कॉल पर पांच मिनट में मोपेड सवार युवक हर ब्रांड की शराब उनके घर तक पहुंचा रहे हैं।
मंडला नगर में करीब एक सौ से अधिक अवैध ठिकाने सक्रिय हैं, जहां रोजाना वाहनों से खेप पहुंचाई जाती है। कई जगहों पर तो बाकायदा बारनुमा ठिकाने संचालित किए जा रहे हैं, जहां देर रात तक जाम छलकते हैं। इतना ही नहीं, शराब के अवैध कारोबार को लेकर लाइसेंसी ठेकेदारों और स्थानीय नेटवर्क में खींचतान बढ़ गई है। रात्रि में हथियारों के बल पर वाहन जांच तक की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे कानून व्यवस्था पर गहरा संकट मंडरा रहा है।
प्रदेश सरकार ने नर्मदा किनारे पांच किलोमीटर तक शराब बिक्री प्रतिबंधित कर रखी है और मंडला नगर क्षेत्र में आठ साल से एक भी लाइसेंसी दुकान नहीं है। बावजूद इसके शराब का कारोबार लाइसेंसी दुकानों से कई गुना बढ़ गया है। शिकायतों पर कार्रवाई केवल खानापूर्ति तक सीमित है—आबकारी विभाग कच्ची शराब जब्त करता है तो पुलिस लाइसेंसी कारोबारियों के इशारे पर खेप पकड़ने का नाटक करती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि शराबबंदी के नाम पर प्रशासन और शराब माफिया के गठजोड़ ने इस धंधे को और पुख्ता कर दिया है। नतीजा यह है कि मंडला जैसे धार्मिक महत्व वाले नगर में न केवल शराबबंदी ठप है, बल्कि कानून व्यवस्था की स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ रही है। जनता में इस पर गहरा आक्रोश है, पर शासन–प्रशासन और जनप्रतिनिधि आंख मूंदे बैठे हैं।
