भोपाल:सांसद आलोक शर्मा ने कलेक्टर कार्यालय में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की. जिसमें सांसद ने तालाब के केचमेंट एरिया में हो रहे अतिक्रमण पर चिंता व्यक्त की. बैठक में कलेक्टर कोशलेन्द्र विक्रम सिंह के साथ ही तहसीलों के एसडीएम, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, नगर निगम के अधिकारी, बिल्डर एसोसियशन क्रेडाई, बार ऐसोसियेशन, स्वास्थ्य विभाग और व्यापारिक संगठन भी शामिल हुए.
बड़े तालाब को कैसे बचाएं, पानी को कैसे स्वच्छ रखें
तालाब की सुरक्षा स्वच्छता शुद्ध पेयजल को लेकर सांसद आलोक शर्मा ने बताया कि शहर में पानी का सबसे बड़ा स्रोत तालाब है, जिसका निर्माण राजभोज ने 11 सौ वर्ष पूर्व करवाया था. यह शहर के लिए जीवदायनी तालाब कहा जाए तो गलत नहीं होगा. तालाब की सुरक्षा और रखरखाव का अभाव है, आज तालाब में शहर के सीवेज का गंदा पानी मिल रहा है,जिस पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध नहीं किया गया है, वहीं तालाब के केचमेंट ऐरिया में जनता ने अतिक्रमण कर मकान बना रखे हैं.
जिससे उनका गंदा पानी तालाब में मिल रहा है. वहीं बड़े बड़े शादी हॉल बने हुए हैं, इससे तालाब के भराव का क्षेत्रफल तो कम हुआ ही है साथ ही इनमें होने वाले आयोजनों का गंदा पानी भी तालाब में मिल रहा है, जो तालाब में गंदगी बढ़ा रहे हैं और पानी को प्रदूषित कर रहे हैं. प्रशासन, नगर निगम के साथ ही अन्य संस्थानों को अवैध अतिक्रमण और सीेवेज की रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए.
पुराने स्वरूप में वापस लाने की जरुरत
सांसद ने बताया कि ग्यारह सौ साल पहले तालाब का निर्माण किया गया था उस समय कितने किलोमीटर तक फैला था. इसमें छोटी नदियों भी मिली हुई थी, जिससे पानी की आवक रहती थी, आज का तालाब अतिक्रमण के चलतेे सिकुड़ गया है. पानी के स्रोत बंद हो गए हैं. तालाब को पुराने स्वरूप में वापस लाने की जरुरत है. उसके लिए शहर की सभी संस्थाओं को कार्य करना चाहिए.
अतिक्रमण हटाने के एनजीटी के निर्देश
भोपाल के तालाब के केचमेंट एरिया में अतिक्रमण को लेकर एनजीटी ने भी सख्त हैं, उसके बाद भी अभी तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं हो सकी है. तालाब का सर्वे होना चाहिए, नये सिरे से तालाब का मास्टर प्लान बनना चाहिए.
भोपाल की शान है तालाब
मध्यप्रदेश के साथ ही पूरे देश मेें भोपाल की पहचान बड़े तालाब और यहां की हरियाली से है. शहर में अगर कोई पर्यटक आता है तो वह तालाब को देखने जरुर आता है. यह शहर वासियों की शान है इसे बचाने के लिए शहर की जनता को भी आगे आना चाहिए.
तालाब से गाद निकालने के प्रयास हों
सांसद शर्मा ने कहा कि सैकड़ों वर्ष हो चुके हैं तालाब को बने हुए, इसमें वर्षों से बारिश के दौरान गाद भरती जा रही है. जिससे तालाब की गहराई कम हो गई है. प्रशासनको चाहिए की तालाब गहराई को नापा जाए और पूर्व की दर्ज गहराई से मिलान कर गाद को निकलवाने का कार्य किया जाना चाहिए. जिससे तालाब में पानी अधिक मात्रा में एकत्रित हो और शहर की जनता को भविष्य पानी की होने वाली समस्या से भी राहत मिल सके
