देहरादून | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपने तीन दिवसीय उत्तराखंड प्रवास के समापन पर सैन्य अधिकारियों और पूर्व सैनिकों से सीधा संवाद किया। गढ़ी कैंट में आयोजित ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ में उन्होंने देश की सुरक्षा और सैन्य नीतियों पर चर्चा की। अग्निवीर योजना को लेकर पूछे गए सवाल पर भागवत ने इसे एक ‘प्रयोग’ करार दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि इस योजना के अनुभवों के आधार पर भविष्य में इसमें आवश्यक सुधार और परिमार्जन (रिफाइनमेंट) किया जाना चाहिए, ताकि राष्ट्र की सैन्य तैयारी और युवाओं का भविष्य दोनों सुरक्षित रहें।
सरसंघचालक ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को राष्ट्रीय एकात्मता का एक सशक्त साधन बताया। उन्होंने कहा कि देश में सामाजिक समरसता के लिए मंदिर, जल स्रोत और श्मशान जैसे सार्वजनिक स्थान सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध होने चाहिए। जनसंख्या असंतुलन के मुद्दे पर उन्होंने मतांतरण और घुसपैठ को बड़ी चुनौती बताते हुए एक व्यापक नीति की आवश्यकता पर जोर दिया। भागवत ने स्पष्ट किया कि हिंदू समाज स्वभाव से उदार और समावेशी है, और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ ही हमारे राष्ट्र का मूल विचार है।
पर्वतीय क्षेत्रों, विशेषकर गढ़वाल से हो रहे पलायन पर चिंता व्यक्त करते हुए मोहन भागवत ने स्थानीय विकास का मॉडल पेश किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देकर ही पहाड़ों की जवानी को रोका जा सकता है। इसके अलावा, उन्होंने पड़ोसी देशों के साथ सांस्कृतिक संबंधों और कश्मीर को भारत का अटूट हिस्सा बताते हुए राष्ट्रविरोधी मुहिमों के प्रति सख्त नीति अपनाने की वकालत की। उन्होंने सोशल मीडिया पर बढ़ती वैचारिक कटुता के बजाय सकारात्मक शास्त्रार्थ और संवाद की परंपरा को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया।

