जबलपुर: विकास कार्य की इबारत की धज्जियां लोक निर्माण विभाग के अधिकारी किस कदर उड़ा रहे हैं इसकी पोल मंत्री की तस्वीर वाले स्वीकृति बोर्ड ने खोल दी। बोर्ड के मुताबिक गुलौआ चौक से नब्बे क्वार्टर तक सड़क के डामलीकरण का 820 मीटर लंबी सड़क तक करीब 95.47 लाख की लागत से पूरा होना था जिसे 600 मीटर लंबाई सड़क तक ही पूरा करके अधूरा छोड़ दिया गया।
आलम ये था कि स्थानीय लोगों ने अधूरे पड़े फुटपाथ निर्माण, व डामलरकरण के कार्य को लेकर सोशल मीडिया में जिम्मेदारों की हकीकत उजागर करते हुए बताया कि लोक निर्माण मंत्री वाले बोर्ड में 90 क्वार्टर का विकास पूरा पूरा बताने लिए 9 के ऊपर 0 लिख दिया जिससे कि सभी को लगे कि विकास कार्य पूरा हो चुका है लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल विपरीत है। हैरानी होती है जब लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री ये कहते नजर आते हैं कि उनका कार्य क्षेत्र सिर्फ 600 मीटर तक की ही सड़क का था बाकी काम की जिम्मेदारी नगर निगम की थी।
लापरवाही को दिखाता बोर्ड
सवाल ये उठता है कि विकास कार्य कोदर्शाने वाले लगाए गए स्वीकृति बोर्ड में सड़क का कार्य 820 मीटर तक पूरा करने की बात क्या गलत है… जानकारों का कहना है कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण ही विकास कार्य अधूरे पड़े हुए हैं। प्रशासन के द्वारा ऐसी लापरवाही करने वालों पर सख्त कार्रवाई न होना ऐसे जिम्मेदारों का हौंसला बढ़ाती है और नतीजा कुछ इस तरह ही सभी के सामने आता है।
ये लिखा है बोर्ड में-
–राकेश सिंह विधायक पश्चिम क्षेत्र, मंत्री लोक निर्माण विभाग द्वारा स्वीकृत गुलौआ चौक से नब्बे क्वार्टर तक डामलीकरण का कार्य, लंबाई 820 मीटर लागत 95.47 लाख।
इनका कहना है-
–हमारे विभाग का काम जितने क्षेत्र तक सीमित था उतना कार्य पूरा हो चुका है। अभी तक गुलौआ से 90 क्वार्टर तक के क्षेत्र के डमलीकरण के मामले में 600 मीटर सड़क का विकास कार्य किया जा चुका है। इसके बाद की जिम्मेदारी हमारे विभाग की नहीं है।
–शिवेंद्र सिंह, कार्यपालन यंत्री, संभाग क्रमांक 2 लोक निर्माण विभाग जबलपुर।
