पड़ाना की बदहाली: 20 से अधिक बसों का संचालन, पर बस स्टैंड का नामोनिशान नहीं

पड़ाना। 20 से ज्यादा परमिट की बसों का नियमित रूप से आवागमन, 65 किमी का हाईवे और चारों दिशाओं में नागरिक यातायात सुचारू ऐसे में शासन को पात्री वाहनों के माध्यम से राजस्व की अच्छी कमाई होगी. लेकिन इस राजस्व का लाभ क्षेत्र के लोगों को सुविधा के रूप में नहीं मिल रहा है. बात पड़ाना कस्बे की है जहां अब तक बस स्टेण्ड को लेकर कोई सुविधा नहीं है. नागरिकों ने सीधे तौर पर मांग रखी है कि जब शासन को बसों के परमिट और हाईवे के टोल के माध्यम से राजस्व की प्राति हो रही है तो फिर उसका उपयोग पड़ाना में बस स्टेण्ड के लिए भी होना चाहिए, गौरतलब है कि लगातार आबादी और यातायात के मान से बढ़ रहे पड़ाना कस्बे में बस स्टेण्ड नहीं

है. यहां बसें सड़क किनारे खड़ी

होती है, अपने शेड्यूल अनुसार

इंदौर, भोपाल तक सीधी बस सेवाएं

पड़ाना से भोपाल, शुजालपुर, सारंगपुर, शाजापुर, इंदौर, उज्जैन तक सीधे तौर पर बसें संचालित हो रही है. भोपाल से इकलेरा के रास्ते बसें वहां पहुंचती है. वहीं इंदौर, शुजालपुर और सांस्यपुर सहित शाजापुर के लिए भी कई बसें संचालित हो रही है. करीब दो दर्जन बसों का हर आधे घंटे में यहां से आना जाना होता है. ऐसे में यात्रियों की संख्या भी काफी मिलती है और बस संचालकों की कमाई और सरकार को राजस्व भी पर्याप्त मिल जाता है. ऐसे में यदि बस स्टेण्ड बना दिया जाए तो इस बढ़ते यातायात को एक और सुविधा मिल जाएगी, गांव के इमरान मंसूरी, मुकेश जलोदिया, संतोष मालवीय, राजेश सेन, युनूस मैकेनिक, राहुल वर्मा, सतीश, मनोहर, अरूण, घनश्याम, विक्री आदि ने बताया कि जल्द शासन को यहां बस स्टेण्ड की व्यवस्था करनी चाहिए.

आती है और सवारियां लेकर चली जाती है. पात्री इंतजार भी सड़क किनारे दुकानों के

आसपास करते हैं और बसें भी यहीं यात्रियों को लेकर आती जाती है.

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