रोशनी कलेश मामले की जांच के लिए SIT गठित, 3 महीने में सौंपेगी रिपोर्ट

भोपाल। विधानसभा में आज स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज की छात्रा रोशनी कलेश की मौत के मामले में सरकार की ओर से विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है, जो तीन महीने में अपनी जांच कर लेगा।

श्री पटेल कांग्रेस विधायक सेना पटेल और राजन मंडलोई की ध्यानाकर्षण सूचना का उत्तर दे रहे थे। श्री पटेल ने कहा कि छात्रा रोशनी का पोस्टमार्टम पांच डॉक्टरों के पैनल ने छात्रा के परिजन की मौजूदगी में किया था। मौत के कारणों की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है, जिसमें तीन महिला अधिकारियों को शामिल किया गया है।

उन्होंने इस मामले की सीबीआई या न्यायिक जांच की कांग्रेस विधायकों की मांग पर कहा कि एसआईटी से तीन महीने में जांच करा ली जाएगी।

साथ ही उन्होंने छात्रा के साथ किसी प्रकार के जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना से इंकार करते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेजों में मेंटर की व्यवस्था होती है। हालांकि इस छात्रा के प्रकरण को लेकर उन्होंने कहा कि ये छात्रा नवंबर में कॉलेज में आई थी और फरवरी में ये घटना घटित हो गई। आगे से मेंटर तत्परता से काम करें, शासन इसकी व्यवस्था करेगा।

उन्होंने कहा कि छात्रा के माेबाइल की भी जांच की गई है। प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर ये पढ़ाई के तनाव के कारण उठाया गया आत्मघाती कदम है। हत्या का कोई साक्ष्य नहीं मिला है।

मंत्री के जवाब से असंतुष्ट नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि आदिवासी परिवार की बच्ची रोशनी पढाई में मेधावी थी। ऐसे में वो पढाई के तनाव से आत्महत्या कैसे कर सकती है। उन्होंने दावा किया कि छात्रा के शरीर पर नीले निशान पाए गए हैं, साथ ही उन्होंने छात्रा के साथ दुष्कर्म का भी आरोप लगाया।

विधायक सेना पटेल और राजन मंडलोई ने भी आदिवासी बच्चों के साथ मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में जातिगत भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें इस मामले में पुलिस जांच पर भरोसा नहीं है।

अलीराजपुर जिले से आने वाली आदिवासी छात्रा रोशनी कलेश जीएमसी भोपाल में प्रथम वर्ष की छात्रा थी। उसकी पिछले दिनों मौत के बाद प्रथमदृष्टया इसे पढ़ाई के तनाव के कारण की गई आत्महत्या माना गया है। छात्रा के मोबाइल से भी पुलिस को कई ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जो आत्महत्या की ओर संकेत कर रहे हैं।

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