नयी दिल्ली, 23 फरवरी (वार्ता) वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सोमवार को कहा कि परोपकारी सोच वाली उद्यमिता के साथ सरकार का प्रोत्साहन देश को दुनिया में नंबर-1 बना सकता है, और इसके लिए यह बिल्कुल सही समय है।
श्री अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में यह बात कही। उन्होंने हिस्ट्री चैनल की एक श्रृंखला का जिक्र करते हुए अपनी बात शुरू की जिसमें अमेरिका के निर्माण के कर्णधारों के रूप में सिर्फ उद्यमियों को चुना गया है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “अमेरिका को किसने बनाया? आपको जानकर आश्चर्य होगा – न कोई राजनेता, न वैज्ञानिक और न ही कोई बुद्धिजीवी। इस विषय पर हिस्ट्री चैनल की एक शानदार श्रृंखला है, जिसमें उन्होंने केवल उद्यमियों को चुना है।”
हिस्ट्री चैनल ने कॉर्नेलियस वेंडरबिल्ट, एंड्रयू कार्नेगी, जॉन रॉकफेलर, जे.पी. मॉर्गन और हेनरी फोर्ड को चुना है जिन्होंने क्रमशः अवसंरचना, इस्पात, तेल, बैंकिंग और ऑटोमोबाइल जैसे बुनियादी और प्रमुख उद्योगों की नींव रखी।
श्री अग्रवाल ने लिखा, “इस भारत का निर्माण कौन करेगा? हमें अपने उद्यमियों को प्रोत्साहित करना चाहिये, उन पर विश्वास करना चाहिये, उन्हें सम्मान और गरिमा देनी चाहिये। वे परिसंपत्तियां बनाएंगे, प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग करेंगे, रोजगार सृजन करेंगे, राजस्व में योगदान देंगे और देश के उत्थान को गति देंगे।”
उन्होंने कहा कि उद्यमियों को प्रक्रियाओं में उलझाकर विचलित नहीं किया जाना चाहिए, उन्हें स्व-प्रमाणीकरण की अनुमति दी जानी चाहिए और अपनी पूरी ऊर्जा अपने व्यवसाय के निर्माण में लगाने देना चाहिए।
उन्होंने लिखा, “मुझे कोई संदेह नहीं है कि हम अमेरिका से भी बेहतर कर सकते हैं। हमारे प्राकृतिक और मानव संसाधन अत्यंत विशाल हैं। हमारी महिलाओं की शक्ति और संभावनाएं अतुलनीय हैं। मुझे विश्वास है कि परोपकारी सोच के साथ गतिशील उद्यमिता, जिसे सरकार द्वारा सुगम बनाया जाये और समाज द्वारा सराहा जाये, वही देश को नंबर बनायेगी। यदि यह मोदी सरकार के कार्यकाल में नहीं होगा …तो फिर कब होगा?”
अपने पोस्ट में वेदांता के चेयरमैन ने बताया है कि कैसे अमेरिका में उद्योगपतियों ने विश्वविद्यालयों के निर्माण के लिए दान दिये जो देश के विकास का आधार बने। अमेरिका के शीर्ष 40 में से अधिकांश विश्वविद्यालय निजी दान से बने हैं। वहां के कई उत्कृष्ट पुस्तकालय, थिंक टैंक और अस्पताल भी उद्यमियों द्वारा समाज को लौटाई गयी संपत्ति से बने हैं।
उन्होंने कहा, “भारत भी कुछ मायनों में अमेरिका से मिलता-जुलता है। यह एक बड़ा देश है, जहां उद्यमिता की परंपरा है और जो प्रचुर प्राकृतिक तथा मानव संसाधनों से संपन्न है।”
