
भोपाल। हिन्दी लेखिका संघ, मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित 31वां वार्षिक उत्सव एवं कृति पुरस्कार सम्मान समारोह रविवार को पं. रविशंकर सभागृह, हिन्दी भवन में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आईं साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे आयोजन का साहित्यिक महत्व और बढ़ गया।
संघ की प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. साधना गंगराड़े ने स्वागत भाषण में वर्षभर आयोजित साहित्यिक गोष्ठियों, काव्य पाठ, पुस्तक विमोचन, युवा लेखन प्रोत्साहन एवं प्रकाशन गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ महिला रचनाकारों को सशक्त मंच प्रदान करने के लिए सतत प्रयासरत है।
अध्यक्षीय संबोधन में अखिल भारतीय साहित्य परिषद की प्रांतीय मंत्री डॉ. करुणा सक्सेना ने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने का माध्यम है। उन्होंने रचनाकारों से आह्वान किया कि वे केवल संवेदनाओं का चित्रण न करें, बल्कि समाधानपरक लेखन को भी प्राथमिकता दें।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार सूर्यकांत नागर ने लेखन को साधना बताते हुए कहा कि सच्ची रचना वही है, जो लेखक की संवेदना को पाठक के हृदय तक पहुँचा दे। विशिष्ट अतिथि रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं विश्वरंग के निदेशक डॉ. संतोष चौबे ने साहित्य को वैचारिक ऊर्जा का स्रोत बताया और कहा कि महिलाएँ पारिवारिक दायित्वों के साथ भी भाषा और साहित्य को जीवंत बनाए रखती हैं।
समारोह में सर्जना स्मारिका का लोकार्पण किया गया। विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट साहित्यकारों को सम्मानित किया गया, जिनमें वरिष्ठता, सेवा, हिंदी सेवी और कर्मठता सम्मान शामिल रहे। साथ ही उपन्यास, ग़ज़ल, नाटक, लघुकथा, लोक साहित्य, बाल साहित्य एवं अन्य विधाओं में कृति पुरस्कार प्रदान किए गए। मीडिया जगत से जुड़े प्रतिनिधियों को भी विशेष सम्मान दिया गया।
कार्यक्रम का संचालन शशि बंसल ने किया, वार्षिक प्रतिवेदन संघ की सचिव श्रीमती सुनीता यादव ने प्रस्तुत किया तथा आभार प्रदर्शन श्रीमती वर्षा चौबे ने किया। समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यकार, बुद्धिजीवी और साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
