नयी दिल्ली, 22 फरवरी (वार्ता) रणवीर सिंह की ‘धुरंधर : द रिवेंज (धुरंधर 2)’ और यश की ‘टॉक्सिक’ फिल्म के बीच होने वाले बड़े बॉक्स ऑफिस मुकाबले को लेकर उत्सुकता बढ़ती जा रही है। निर्देशक आदित्य धर के काम की खुले तौर पर सराहना करते आए फिल्मकार राम गोपाल वर्मा ने इस बहुप्रतीक्षित टकराव पर एक बार फिर स्पष्ट पक्ष लेते नजर आए। वर्मा ने एक्स पर एक लंबी पोस्ट में इस हाई-प्रोफाइल विवाद को लेकर अपना नजरिया साझा करते हुए कहा कि यह मुकाबला उत्तर बनाम दक्षिण या बॉलीवुड बनाम सैंडलवुड का नहीं है, बल्कि सिनेमा की दो अलग-अलग संस्कृतियों के बीच की टक्कर है। उन्होंने माना कि दोनों फिल्मों के अपने-अपने मजबूत प्रशंसक वर्ग हैं, लेकिन असली फर्क इस बात में है कि ये फिल्में दर्शकों को किस नजर से देखती हैं।
वर्मा ने लिखा, “मेरा पक्का विश्वास है कि ‘धुरॉक्सिक’ उत्तर बनाम दक्षिण या बॉलीवुड बनाम सैंडलवुड नहीं है। यह दरअसल क्षेत्रों की नहीं, बल्कि सिनेमा की दो संस्कृतियों की जबर्दस्त टक्कर है। मुख्य अंतर यह है कि ‘धुरंधर’ दर्शकों की बुद्धिमत्ता का सम्मान करती है, जबकि ‘टॉक्सिक’ उन्हें मूर्ख मानकर चलती है। केजीएफ: चैप्टर 2 एक स्थानीय फिल्म थी, जो भीड़ की मूर्खता को लक्ष्य करती थी, जबकि ‘धुरंधर’ ने जनसमूह की बुद्धिमत्ता को लक्ष्य किया।”
उन्होंने कहा कि केवल भव्यता नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता को आकर्षित करना ही किसी फिल्म को वैश्विक सफलता दिलाता है। उन्होंने कहा, “यही वजह है कि वह (धुरंधर) वैश्विक फिल्म बनी। कथित तौर पर 130 करोड़ रुपये की ‘धुरंधर'(दोनों संस्करण मिलाकर लगभग 260 करोड़ रुपये) ने करीब 1,500 करोड़ रुपये की कमाई की, जिससे साबित हुआ कि तथाकथित ‘जनसमूह’ असल में मसाला फिल्मकारों की सोच से कहीं ज्यादा समझदार हैं।” वर्मा ने कहा, “यह अहम है कि ‘आदित्य धर फिल्म्स’ ने कभी भी दर्शकों को मूर्ख नहीं माना। रिलीज के बाद जनता ने गूंजती हुई आवाज में जवाब दिया, ‘हां, हम वाकई इतने ही बुद्धिमान हैं… हमें समझने के लिए शुक्रिया।”
वर्मा ने दोनों फिल्मों के बीच 10 बुनियादी अंतरों का भी जिक्र किया, जिनमें अंधभक्ति बनाम दर्शकों द्वारा स्वयं नायक को खोजने की प्रक्रिया, गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देने वाले एक्शन बनाम यथार्थवादी एक्शन और एक सितारे को देवता बनाने के बजाय सभी पात्रों को समान महत्व देना शामिल है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी किसी व्यक्तिगत पक्षपात के कारण नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के भविष्य को लेकर उनकी उम्मीदों से प्रेरित है। उन्होंने कहा, “यह मेरी आदित्य धर फिल्म्स के प्रति मोहब्बत नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के लिए मेरी आशा है। मैं बेसब्री से 19 मार्च का इंतजार कर रहा हूं यह जानने के लिए कि भारत ‘धुरंधर’ है या ‘टॉक्सिक’।” जैसे-जैसे रिलीज की तारीख नजदीक आ रही है, दोनों बड़ी बजट की फिल्मों को लेकर बहस और तेज होती जा रही है, जिससे इस साल की सबसे चर्चित बॉक्स ऑफिस जंग की जमीन तैयार हो चुकी है।

