साइप्रस में ‘खुरपका-मुंहपका’ बीमारी का प्रकोप, संक्रमण रोकने के लिए 300 पशुओं को मारा जायेगा

निकोसिया, 21 फरवरी (वार्ता) साइप्रस के अधिकारियों ने पशुओं में ‘खुरपका-मुंहपका’ बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए लार्नका जिले के कुछ हिस्सों में बेहद सख्ती भरे नियमों को लागू करते हुए और 300 पशुओं को मारने का फैसला किया है।

‘साइप्रस मेल’ की शनिवार की रिपोर्ट के अनुसार, इस बीमारी का मुख्य केंद्र जिले का ओरोक्लिनी गांव है, जबकि इससे जुड़े मामले पास के लिवाडिया क्षेत्र में भी दर्ज किए गए हैं।

पशु चिकित्सा अधिकारियों ने शुक्रवार को लिवाडिया में एक गाय प्रजनन इकाई में ‘खुरपका-मुंहपका’ के पहले मामले की पुष्टि की थी। जांच में सामने आया कि संक्रमण का केंद्र ओरोक्लिनी की दो बड़ी भेड़ और बकरी इकाइयां हैं। यह वायरस यहां कम से कम दो सप्ताह से मौजूद है। स्वच्छता प्रोटोकॉल के तहत लिवाडिया फार्म के लगभग 300 मवेशियों को मारा जा रहा है और वहां के दूध व मांस सहित सभी उत्पादों को जब्त कर लिया गया है।

सुरक्षा नियमों के अनुसार, तीन किलोमीटर के सुरक्षा घेरे के भीतर कोई भी नया मामला मिलने पर प्रभावित परिसर के सभी जानवरों को मार दिया जाएगा।

रोकथाम क्षेत्र में स्थित 23 पशुधन फार्मों का प्रतिदिन निरीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों ने जानवरों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी है, सड़कें ब्लॉक कर दी हैं और वाहनों को कीटाणुमुक्त किया जा रहा है। निगरानी के लिए पुलिस गश्त भी बढ़ा दी गई है।

इसके साथ ही निजी क्षेत्र और अन्य जिलों से पशु चिकित्सकों को बुलाया जा रहा है और पशु आहार सहित संक्रमण के संभावित मार्गों की जांच की जा रही है। यदि अगले 21 दिनों तक कोई नया मामला सामने नहीं आता है, तो इन प्रतिबंधों को हटाया जा सकता है।

 

 

 

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